मध्य प्रदेश की राजनीति में किसान मुद्दों को लेकर एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। जीतू पटवारी ने 7 मई 2026 को महाराष्ट्र से राजस्थान सीमा तक “महाचक्का जाम” करने की चेतावनी देकर राज्य और केंद्र सरकार पर सीधा दबाव बनाने की कोशिश की है।
पटवारी ने इस प्रस्तावित आंदोलन को किसानों की “हुंकार” बताते हुए कहा कि यह सिर्फ एक विरोध प्रदर्शन नहीं, बल्कि उन लाखों किसानों की आवाज है जो लंबे समय से अपनी फसलों के उचित दाम, कर्ज राहत, सिंचाई की सुविधाएं और अन्य बुनियादी समस्याओं के समाधान के लिए संघर्ष कर रहे हैं। उनका आरोप है कि सरकार लगातार किसानों के मुद्दों को नजरअंदाज कर रही है और नीतिगत स्तर पर कोई ठोस कदम नहीं उठा रही।
उन्होंने कहा कि किसान अपनी उपज का वाजिब मूल्य नहीं मिलने से आर्थिक संकट में हैं। कई क्षेत्रों में समर्थन मूल्य (MSP) का लाभ किसानों तक पूरी तरह नहीं पहुंच पा रहा है, वहीं बढ़ती लागत—जैसे बीज, खाद और डीजल—ने उनकी परेशानियों को और बढ़ा दिया है। ऐसे में किसानों के पास आंदोलन के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है।
पटवारी ने चेतावनी दी है कि 7 मई को होने वाला “महाचक्का जाम” बड़े स्तर पर आयोजित किया जाएगा, जिसमें प्रमुख राष्ट्रीय और राज्य मार्गों को बाधित किया जा सकता है। इससे महाराष्ट्र और राजस्थान को जोड़ने वाले मार्गों पर यातायात प्रभावित होने की संभावना है। उन्होंने किसानों, किसान संगठनों और आम जनता से इस आंदोलन में शामिल होने की अपील भी की है।
इस बयान के साथ उन्होंने राज्य और केंद्र सरकार दोनों को निशाने पर लेते हुए कहा कि यदि समय रहते किसानों की मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया, तो यह आंदोलन और भी उग्र रूप ले सकता है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि भविष्य में इससे बड़े स्तर पर विरोध प्रदर्शन किए जा सकते हैं।
राजनीतिक रूप से भी इस आंदोलन को अहम माना जा रहा है, क्योंकि इससे एक बार फिर किसान मुद्दे केंद्र में आ सकते हैं और सरकार पर दबाव बढ़ सकता है। वहीं प्रशासन के लिए कानून-व्यवस्था बनाए रखना और यातायात सुचारू रखना एक बड़ी चुनौती बन सकता है।
कुल मिलाकर, 7 मई का प्रस्तावित “महाचक्का जाम” सिर्फ एक प्रदर्शन नहीं, बल्कि किसानों की नाराजगी का बड़ा संकेत माना जा रहा है, जिसका असर प्रदेश के साथ-साथ पड़ोसी राज्यों पर भी पड़ सकता है।
न्यूज़ बाय
रज़ा लाला ख़ान
न्यूज़ 100 के लिए
