15 से 17 जून तक होने वाले G7 सम्मेलन से पहले हजारों सैनिक और सुरक्षाकर्मी तैनात, सीमा नियंत्रण और हवाई निगरानी बढ़ाई गई |
फ्रांस और स्विट्जरलैंड में आगामी G7 शिखर सम्मेलन को लेकर सुरक्षा व्यवस्था अभूतपूर्व स्तर पर पहुंच गई है। 15 से 17 जून तक फ्रांस के एवियां क्षेत्र में आयोजित होने वाले इस महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में दुनिया की प्रमुख आर्थिक शक्तियों के राष्ट्राध्यक्ष और शीर्ष नेता शामिल होंगे। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप सहित कई वैश्विक नेताओं की मौजूदगी को देखते हुए दोनों देशों ने सुरक्षा के व्यापक और बहुस्तरीय इंतजाम किए हैं।
G7 शिखर सम्मेलन विश्व की सात प्रमुख औद्योगिक अर्थव्यवस्थाओं के नेताओं का एक महत्वपूर्ण मंच है, जहां वैश्विक अर्थव्यवस्था, व्यापार, सुरक्षा, जलवायु परिवर्तन, ऊर्जा, भू-राजनीतिक संकट और अंतरराष्ट्रीय सहयोग जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा होती है। इस वर्ष सम्मेलन कई संवेदनशील वैश्विक विषयों के कारण विशेष रूप से चर्चा में है, जिसके चलते सुरक्षा एजेंसियां किसी भी संभावित खतरे को लेकर पूरी तरह सतर्क हैं।
फ्रांस और स्विट्जरलैंड की सुरक्षा एजेंसियों को आशंका है कि सम्मेलन के दौरान जलवायु परिवर्तन, वैश्विक व्यापार शुल्क, आर्थिक नीतियों, अंतरराष्ट्रीय संघर्षों तथा अमेरिकी नीतियों के विरोध में बड़े पैमाने पर प्रदर्शन हो सकते हैं। अतीत में भी G7 और अन्य अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों के दौरान बड़े विरोध प्रदर्शन देखे गए हैं, जिनमें कई बार हिंसक घटनाएं भी सामने आई थीं। इसी अनुभव को ध्यान में रखते हुए इस बार सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक मजबूत बनाया गया है।
स्विट्जरलैंड ने संभावित सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के लिए लगभग 4,000 सैनिकों की तैनाती की है। वहीं फ्रांस ने पुलिस, अर्धसैनिक बलों और विशेष सुरक्षा इकाइयों सहित 13,000 से अधिक सुरक्षाकर्मियों को तैनात किया है। सम्मेलन स्थल और उसके आसपास के क्षेत्रों में चौबीसों घंटे निगरानी रखी जा रही है। आधुनिक तकनीकों, ड्रोन निगरानी, सीसीटीवी नेटवर्क और खुफिया तंत्र को भी सक्रिय कर दिया गया है।
दोनों देशों ने सीमा क्षेत्रों पर निगरानी बढ़ा दी है और सीमा पार आवाजाही पर विशेष नियंत्रण लागू किया गया है। सम्मेलन के दौरान कई स्थानों पर अस्थायी जांच चौकियां स्थापित की गई हैं, जहां यात्रियों और वाहनों की गहन जांच की जा रही है। अधिकारियों का उद्देश्य किसी भी संदिग्ध गतिविधि को समय रहते रोकना और सम्मेलन की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
हवाई सुरक्षा को भी सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है। सम्मेलन के दौरान एवियां और आसपास के क्षेत्रों के ऊपर विशेष हवाई निगरानी व्यवस्था लागू रहेगी। कुछ क्षेत्रों में हवाई यातायात पर प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं, जबकि निजी विमानों और ड्रोन संचालन पर भी कड़ी निगरानी रखी जाएगी। सुरक्षा एजेंसियां वायु क्षेत्र में किसी भी अनधिकृत गतिविधि को तुरंत रोकने के लिए तैयार रहेंगी।
सम्मेलन के दौरान सड़क यातायात पर भी व्यापक असर पड़ने की संभावना है। कई प्रमुख मार्गों को अस्थायी रूप से बंद किया जाएगा, जबकि कुछ क्षेत्रों में केवल अधिकृत वाहनों को ही प्रवेश की अनुमति होगी। स्थानीय प्रशासन ने नागरिकों को यात्रा योजनाएं पहले से तय करने और वैकल्पिक मार्गों का उपयोग करने की सलाह दी है। सीमा क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को भी अतिरिक्त समय लेकर यात्रा करने की चेतावनी दी गई है।
सुरक्षा व्यवस्था के मद्देनजर जिनेवा और आसपास के क्षेत्रों में स्थित कुछ अंतरराष्ट्रीय संस्थानों और संगठनों ने अपने कर्मचारियों को वर्क फ्रॉम होम की सुविधा प्रदान की है। कई कार्यालयों ने सम्मेलन अवधि के दौरान कर्मचारियों की आवाजाही सीमित करने और डिजिटल माध्यमों से कार्य संचालन करने का निर्णय लिया है। इससे सुरक्षा बलों पर दबाव कम करने और संभावित व्यवधानों से बचने में मदद मिलेगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों में आयोजित हो रहा यह G7 सम्मेलन कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर निर्णायक साबित हो सकता है। ऐसे में सम्मेलन की सफलता और वैश्विक नेताओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए फ्रांस और स्विट्जरलैंड कोई जोखिम नहीं लेना चाहते। यही कारण है कि दोनों देशों ने सुरक्षा, निगरानी और आपातकालीन प्रतिक्रिया व्यवस्थाओं को सर्वोच्च स्तर पर सक्रिय कर दिया है।
अब पूरी दुनिया की नजर इस सम्मेलन पर टिकी है, जहां वैश्विक अर्थव्यवस्था, अंतरराष्ट्रीय संबंधों और भविष्य की नीतियों को लेकर महत्वपूर्ण चर्चाएं होने की उम्मीद है। वहीं सुरक्षा एजेंसियों के लिए यह आयोजन एक बड़ी परीक्षा भी माना जा रहा है, क्योंकि उन्हें लाखों लोगों की गतिविधियों के बीच विश्व नेताओं की सुरक्षा सुनिश्चित करनी है।
