लाखों खर्च करने के बाद आराम मिला 500 में आज के व्यस्त जीवन में हर इंसान किसी न किसी बीमारी से ग्रस्त है | आज के समय में एक बीमारी जो अधिकतर लोगों में पाई जाने लगी वो है नस की प्रॉब्लम साइटिका डिक्स घुटनों में दर्द हाथ पैरों का सुन्न होना ये जैसे आम बात हो गई है |
जब डाक्टर को दिखाते है तो वो पहले पेन किलर देकर दर्द को दबाने की कोशिश करते है फिर नस दबी है ये कहकर आपरेशन करना पड़ेगा ये कहते है | मगर आज भी कई ऐसे लोग भारत में मौजूद है जो डाक्टर तो नहीं है मगर किस नस से बॉडी में कह प्रॉब्लम होती है इस बात की जानकारी रखते है | भोपाल करोंद सईद कॉलोनी में एक ऐसे डाक्टर है जिनका नाम इलियास है जिन्होंने डाक्टरी की न पढ़ाई की न डिग्री ली मगर आम लोग उन्हें डाक्टर के नाम से जानते है लाखों रुपए खर्च करने के बाद जो मरीज ठीक नहीं होते वो 500 रुपए में यह से ठीक होकर चले जाते है |
नसों की ऐसी जानकारी बड़े से बड़े डाक्टर के तजुर्बे को इसके आगे फेल होते नजर आते है | डाक्टर जब आपरेशन ही मात्र उपाय बताते है वो मरीज बिना आपरेशन के ठीक होकर यह से जाते हुए देखे गए दर्द से निढाल आंखों में आसू वो मरीज जब वापिस जाता है तो चेहरे पर हंसी ओर दिल में सुकून जैसे उसे उसकी बीमारी से हमेशा के लिए राहत मिल गई आज न्यूज 💯 टिम ने नसों के डाक्टर के नाम से पहचाने जाने वाले इलयास जी के क्लीनिक का दौरा किया एक मरीज जिस की कमर से एक पैर में बहुत दर्द रहता लगभग दो महीने से डाक्टर की सलाह से दवाई खा रहे थे मगर दर्द खत्म होने का नाम नहीं ले रहा था
कैमरे के सामने इलाज शुरू हुआ और मरीज के मुंह से आखिर में एक बात निकली मुझे आराम महसूस हो रहा |
अब जो दर्द मुझे लगातार परेशान कर रहा था अब वो नहीं हो रहा डाक्टर इलयास का दावा घुटने के ऑपरेशन दो नसे दबी हो कमर की उसके ऑपरेशन का डाक्टर बोले एक बार मेरे पास मरीज आपरेशन से पहले आए गारंटी से उसे आराम मिलेगा नसों की कोई भी प्रॉब्लम हो जिसका डाक्टर ने आपरेशन एक मात्र इलाज बताया हो एक बार में उसे आराम मिलेगा हर राज्य से मरीज आते है ओर ठीक होकर जाते है |
इसे ऊपर वाले का आर्शीवाद कहो या बुजुर्गों के तजुर्बे पर अमल करने का नतीजा लाखों रुपए बर्बाद करने के बाद डाक्टर इलयास बिना डिग्री के इलाज से ठीक होकर जाते है मरीज डाक्टर इलयास से संपर्क करने के लिए +91 93006 04000 पर कांटेड कर सकते है मगर हम तो यही कहेंगे कि जबतक हमने देखा नहीं था तो विश्वास नहीं था मगर जब आज खुद देखा तो उनके तजुर्बे को सलाम करने का दिल चाहता है |
न्यूज बाय
आजम लाला
