अयोध्या। राम मंदिर में दान और चढ़ावे से जुड़े कथित वित्तीय अनियमितताओं का मामला लगातार गहराता जा रहा है। अब इस विवाद में एक नया कानूनी और सामाजिक मोड़ सामने आया है। अयोध्या बार एसोसिएशन ने श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय, ट्रस्ट से जुड़े अनिल मिश्रा और एक अन्य पदाधिकारी गोपाल राव के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग करते हुए पुलिस को औपचारिक शिकायत सौंपी है।
पुलिस थाने पहुंचा बार एसोसिएशन
बार एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने अयोध्या के संबंधित पुलिस थाने में शिकायत देकर मांग की है कि दान प्रबंधन और कथित अनियमितताओं के पूरे मामले में चंपत राय, अनिल मिश्रा और गोपाल राव की भूमिका की भी निष्पक्ष जांच की जाए। शिकायत में कहा गया है कि यदि पुलिस एफआईआर दर्ज नहीं करती है तो एसोसिएशन न्यायालय का दरवाजा खटखटाएगा और भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 156(3) के तहत न्यायिक हस्तक्षेप की मांग करेगा।
पहले भी लिया था बड़ा फैसला
इससे पहले फैजाबाद बार एसोसिएशन की आमसभा में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया था कि राम मंदिर दान मामले में गिरफ्तार आठ आरोपियों की पैरवी एसोसिएशन का कोई भी सदस्य नहीं करेगा। साथ ही मामले की सीबीआई जांच की मांग भी उठाई गई थी। एसोसिएशन ने यह भी कहा था कि यदि कोई वकील आरोपियों की ओर से पैरवी करना चाहता है तो उसे एसोसिएशन के निर्धारित नियमों का पालन करना होगा।
जांच का दायरा लगातार बढ़ रहा
राम मंदिर दान विवाद की जांच कर रही विशेष जांच टीम (SIT) पहले ही दान पेटियों, नकद गिनती व्यवस्था, बैंकिंग प्रक्रिया, सीसीटीवी निगरानी और प्रशासनिक प्रबंधन सहित कई पहलुओं की जांच कर रही है। मामले में आठ लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है और जांच एजेंसियां कथित वित्तीय अनियमितताओं की विभिन्न कड़ियों को जोड़ने में जुटी हैं।
चंपत राय का पक्ष
हाल ही में पूछताछ के दौरान चंपत राय ने अपने ऊपर लगे आरोपों से इनकार करते हुए कहा कि उनका कथित दान गड़बड़ी से कोई संबंध नहीं है। उन्होंने दावा किया कि सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने और अनियमितताओं का पता लगाने के उद्देश्य से उन्होंने स्वयं निगरानी व्यवस्था को मजबूत करने के निर्देश दिए थे। पुलिस ने उनके बयान दर्ज किए हैं, हालांकि जांच से जुड़े विवरण सार्वजनिक नहीं किए गए हैं।
राजनीतिक और कानूनी हलचल तेज
राम मंदिर देश की करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है, ऐसे में इस मामले ने राजनीतिक और कानूनी दोनों स्तरों पर व्यापक चर्चा छेड़ दी है। विपक्ष पारदर्शी जांच की मांग कर रहा है, जबकि विभिन्न धार्मिक और सामाजिक संगठनों की ओर से भी निष्पक्ष कार्रवाई की बात कही जा रही है। दूसरी ओर, विश्व हिंदू परिषद ने बार एसोसिएशन की कुछ मांगों पर आपत्ति जताते हुए कहा है कि कानून के तहत प्रत्येक व्यक्ति को निष्पक्ष कानूनी बचाव का अधिकार प्राप्त है।
महत्वपूर्ण नोट
यह मामला वर्तमान में जांच के अधीन है। चंपत राय, अनिल मिश्रा या अन्य संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ लगाए गए आरोप अभी जांच और कानूनी प्रक्रिया का हिस्सा हैं। किसी भी व्यक्ति की जिम्मेदारी या दोष तय होना संबंधित जांच एजेंसियों की अंतिम रिपोर्ट और न्यायालय के निर्णय के बाद ही माना जाएगा।
