पिछले 4 वर्षों से दलित और पिछड़े वर्ग के युवा भर्ती घोटाले के खिलाफ संघर्ष कर रहे हैं। उनकी मांग सिर्फ नौकरी नहीं, बल्कि न्याय और आरक्षण के अधिकार की रक्षा है।भर्ती प्रक्रिया में अनियमितताओं के आरोपों ने सरकारी पारदर्शिता और सिस्टम की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े किए हैं। लंबे इंतजार से युवाओं में निराशा, आर्थिक दबाव और मानसिक तनाव बढ़ा है।
👉 निष्कर्ष: यह सिर्फ भर्ती का मामला नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय और बराबरी के अवसर की बड़ी परीक्षा है।
( सोर्सेज ऑफ़ सोशल मीडिया )
