उत्तराखंड में सड़कों पर बढ़ते हादसों को लेकर जनचिंता लगातार गहराती जा रही है। खासकर तेज रफ्तार और ओवरलोड डंपरों से जुड़े मामलों ने आम लोगों के मन में असुरक्षा का भाव पैदा कर दिया है। कई इलाकों—जैसे देहरादून, कोटद्वार और रामनगर—में स्थानीय लोग आरोप लगा रहे हैं कि खनन से जुड़े भारी वाहन नियमों की अनदेखी करते हुए सड़कों पर दौड़ रहे हैं, जिससे आम नागरिक, खासकर स्कूली बच्चे और दोपहिया वाहन चालक, सबसे ज्यादा जोखिम में हैं।
रिपोर्ट्स और स्थानीय चर्चाओं के अनुसार, रात के समय—विशेषकर रात 10 बजे के बाद—स्थिति और गंभीर हो जाती है। उस दौरान सड़कों पर निगरानी कम होने से तेज रफ्तार और ओवरलोडिंग के मामलों में वृद्धि देखी जाती है। लोगों का कहना है कि इन वाहनों पर प्रभावी नियंत्रण का अभाव है, जिससे दुर्घटनाओं की संख्या बढ़ रही है। हालांकि, यह भी जरूरी है कि इन दावों की आधिकारिक पुष्टि संबंधित विभागों द्वारा समय-समय पर की जाए।
मामले का एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि हादसों के बाद प्रशासनिक प्रतिक्रिया अक्सर मुआवजे तक सीमित नजर आती है। स्थानीय नागरिक सवाल उठा रहे हैं कि दुर्घटनाओं को रोकने के लिए ठोस और निवारक उपाय—जैसे स्पीड गवर्नर अनिवार्य करना, प्रमुख मार्गों पर CCTV कैमरे लगाना, भारी वाहनों के लिए अलग रूट तय करना और सख्त चेकिंग अभियान—क्यों पर्याप्त स्तर पर लागू नहीं किए जा रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि सड़क सुरक्षा एक बहुआयामी मुद्दा है, जिसमें परिवहन विभाग, पुलिस, स्थानीय प्रशासन और खनन से जुड़े नियामक संस्थानों के बीच बेहतर समन्वय की आवश्यकता होती है। यदि ओवरलोडिंग, फिटनेस सर्टिफिकेट, ड्राइवर की कार्यावधि और वाहन की गति पर सख्ती से निगरानी रखी जाए, तो कई हादसों को रोका जा सकता है।
साथ ही, यह आरोप भी सामने आते रहे हैं कि कुछ मामलों में अवैध खनन और परिवहन से जुड़े नेटवर्क के कारण नियमों का पालन कमजोर पड़ जाता है। हालांकि, इस तरह के आरोपों की निष्पक्ष जांच और ठोस प्रमाणों के आधार पर कार्रवाई आवश्यक है, ताकि जिम्मेदार लोगों को जवाबदेह ठहराया जा सके।
कुल मिलाकर, उत्तराखंड में सड़क सुरक्षा का मुद्दा केवल ट्रैफिक नियमों का पालन कराने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह शासन-प्रशासन की जवाबदेही, कानून के प्रभावी क्रियान्वयन और आम जनता की सुरक्षा से जुड़ा व्यापक प्रश्न बन चुका है। जनता अब केवल हादसों के बाद राहत नहीं, बल्कि पहले से ही ठोस और सख्त कदमों की अपेक्षा कर रही है, ताकि सड़कों पर सफर फिर से सुरक्षित बनाया जा सके।
न्यूज बाय
Sabiha khan
