उत्तराखंड में हाल के समय में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में प्रशासन ने कानून-व्यवस्था और अवैध गतिविधियों के खिलाफ व्यापक अभियान तेज किया है। राज्य सरकार की प्राथमिकता अब संगठित अपराध, भूमि माफिया और अवैध ढांचों पर कार्रवाई को लेकर स्पष्ट रूप से दिखाई दे रही है।
राज्य में चलाए जा रहे अभियानों के तहत बड़ी मात्रा में कथित अवैध कब्जों को हटाने और जमीन को मुक्त कराने की कार्रवाई की गई है। प्रशासनिक दावों के अनुसार हजारों एकड़ भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराया गया और सैकड़ों अवैध निर्माणों को ध्वस्त किया गया। सरकार का कहना है कि यह कार्रवाई राज्य की भूमि को अवैध कब्जों और संगठित नेटवर्क से बचाने के उद्देश्य से की जा रही है।
इसी क्रम में “ऑपरेशन कालनेमि” नामक अभियान के जरिए पुलिस और प्रशासन ने फर्जी पहचान बनाकर लोगों को ठगने वाले गिरोहों पर भी कार्रवाई की है। इस अभियान के तहत हजारों लोगों का सत्यापन किया गया, जिसमें सैकड़ों गिरफ्तारियां होने का दावा किया गया है। इनमें ऐसे लोग भी शामिल बताए गए हैं जो साधु या बाबा के वेश में लोगों से धन उगाही करते थे। देहरादून, हरिद्वार और रुड़की जैसे शहरों में इस तरह की कार्रवाइयों की जानकारी सामने आई है, जहां पुलिस ने संदिग्ध व्यक्तियों को हिरासत में लिया।
एक चर्चित मामले में एक विदेशी नागरिक के फर्जी पहचान के साथ रहने और काम करने का आरोप सामने आया, जिसे स्थानीय पुलिस ने गिरफ्तार किया। प्रशासन इसे पहचान छुपाकर अवैध गतिविधियों में शामिल होने के उदाहरण के रूप में प्रस्तुत कर रहा है।
सरकार ने यह भी संकेत दिया है कि संगठित अपराध और दंगों से जुड़े मामलों में अब केवल आपराधिक कार्रवाई ही नहीं, बल्कि नुकसान की भरपाई भी आरोपियों से कराई जाएगी। कुछ मामलों में दंगों या आपराधिक घटनाओं के बाद आरोपियों से सरकारी संपत्ति के नुकसान की वसूली की प्रक्रिया अपनाई जा रही है।
इसके अलावा राज्य में धार्मिक और शैक्षणिक संस्थानों के नियमन को लेकर भी कदम उठाए गए हैं। प्रशासन ने कई अवैध रूप से संचालित संस्थानों को सील करने की कार्रवाई की है। साथ ही, मदरसा शिक्षा व्यवस्था में बदलाव से जुड़े प्रस्ताव और घोषणाएं भी सामने आई हैं, जिन पर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर चर्चा जारी है।
राज्य सरकार की व्यापक रणनीति में नए भू-कानून, जनसंख्या से जुड़े रिकॉर्ड (जैसे कुटुंब रजिस्टर) की जांच और अवैध बस्तियों की पहचान जैसे मुद्दे भी शामिल हैं। सरकार इन कदमों को राज्य की सांस्कृतिक पहचान और संसाधनों की सुरक्षा से जोड़कर प्रस्तुत कर रही है, जबकि आलोचक इन्हें संवेदनशील सामाजिक मुद्दों से जोड़कर देख रहे हैं।
कुल मिलाकर, उत्तराखंड में प्रशासनिक कार्रवाई का यह दौर कानून-व्यवस्था को सख्त बनाने और अवैध गतिविधियों पर रोक लगाने के प्रयास के रूप में सामने आ रहा है। हालांकि, इन कार्रवाइयों और उनसे जुड़े दावों पर विभिन्न पक्षों की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं भी देखने को मिल रही हैं, जिससे यह मुद्दा सार्वजनिक और राजनीतिक विमर्श का केंद्र बना हुआ है।
न्यूज बाय
Sabiha khan
