National Lok Adalat 9 मई 2026, शनिवार को देशभर में आयोजित होने जा रही है। यह वर्ष 2026 की दूसरी बड़ी राष्ट्रीय लोक अदालत मानी जा रही है, जिसमें लाखों लंबित मामलों का आपसी समझौते और सुलह के जरिए एक ही दिन में निपटारा किया जाएगा। जिला न्यायालयों, तहसील स्तर की अदालतों और विभिन्न हाईकोर्ट परिसरों में इस आयोजन को लेकर तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। आम लोगों के लिए यह वर्षों से लंबित मामलों को कम समय और कम खर्च में सुलझाने का बड़ा मौका माना जा रहा है।
लोक अदालत में ऐसे मामलों को प्राथमिकता दी जाती है, जिनका समाधान आपसी सहमति से संभव हो। इसमें बैंक रिकवरी केस, बिजली और पानी के बकाया बिल, पुराने ट्रैफिक ई-चालान, चेक बाउंस के मामले, मोटर दुर्घटना दावा प्रकरण (MACT), वैवाहिक विवाद, पारिवारिक मामले, श्रम विवाद और राजस्व संबंधी केस शामिल हैं। कई राज्यों में सरकारी विभागों और बैंकों को भी निर्देश दिए गए हैं कि वे समझौता योग्य मामलों में राहत और छूट देकर अधिक से अधिक विवादों का समाधान करें।
National Legal Services Authority (NALSA) और राज्य विधिक सेवा प्राधिकरणों की ओर से इस लोक अदालत का संचालन किया जा रहा है। अधिकारियों के अनुसार, इसका मुख्य उद्देश्य अदालतों में लंबित मामलों का बोझ कम करना और लोगों को त्वरित न्याय उपलब्ध कराना है। खास बात यह है कि लोक अदालत में दिया गया फैसला अंतिम और बाध्यकारी होता है, यानी इसके खिलाफ सामान्य परिस्थितियों में अपील नहीं की जा सकती। यही कारण है कि इसे तेज, सरल और कम खर्चीली न्याय व्यवस्था के रूप में देखा जाता है।
इस प्रक्रिया का सबसे बड़ा लाभ यह माना जाता है कि यदि मामला लोक अदालत में सुलझ जाता है, तो पहले जमा की गई कोर्ट फीस पूरी वापस कर दी जाती है। इसके अलावा पक्षकारों को लंबे समय तक कोर्ट के चक्कर, तारीख पर तारीख और भारी वकील खर्च से राहत मिलती है। कई मामलों में बैंक ब्याज में छूट, ट्रैफिक चालान में राहत और आपसी समझौते के जरिए तत्काल समाधान भी संभव हो जाता है।
Uttar Pradesh समेत कई राज्यों में लोक अदालत को लेकर विशेष अभियान चलाया गया है। विधिक सेवा प्राधिकरण की टीमें लोगों को नोटिस भेज रही हैं और समझौते योग्य मामलों की सूची तैयार की जा रही है। आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2025 में केवल उत्तर प्रदेश में एक ही दिन में 30 लाख से अधिक मामलों का निपटारा किया गया था, जिसे देश की सबसे बड़ी वैकल्पिक न्याय प्रक्रिया में से एक माना गया।
कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि जिन लोगों के छोटे-मोटे विवाद वर्षों से लंबित हैं, उनके लिए यह अवसर बेहद उपयोगी हो सकता है। खासकर ट्रैफिक चालान, बैंक लोन विवाद, पारिवारिक झगड़े और बिजली बिल जैसे मामलों में लोक अदालत त्वरित समाधान का प्रभावी माध्यम बन रही है। यदि किसी व्यक्ति का मामला लोक अदालत के दायरे में आता है, तो वह संबंधित अदालत या जिला विधिक सेवा प्राधिकरण से संपर्क कर अपने केस को सूचीबद्ध करा सकता है।
विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि लोक अदालतें केवल मामलों का निपटारा ही नहीं करतीं, बल्कि समाज में समझौते और संवाद की संस्कृति को भी मजबूत बनाती हैं। यही वजह है कि पिछले कुछ वर्षों में इन अदालतों की भूमिका और प्रभाव लगातार बढ़ता दिखाई दे रहा है।
न्यूज बाय: Sabiha Khan
