छतरपुर में केन-बेतवा लिंक परियोजना के खिलाफ आदिवासियों का आंदोलन अब प्रतीकात्मक आत्म-बलिदान के रूप में दिख रहा है।
गले में फंदा डालकर प्रदर्शन :
पिछले 12 दिनों से सैकड़ों आदिवासी महिलाएं केन नदी के किनारे और तालाब में उतरकर गले में फांसी का फंदा लगाकर प्रदर्शन कर रही हैं। ये महिलाएं अपने मासूम बच्चों के साथ प्रदर्शन स्थल पर डटी हैं। उनका कहना है कि प्रोजेक्ट के जरिए उनकी जमीन और जंगल छीने जा रहे हैं।
महिलाएं और पुरुष अपने बच्चों समेत चिताओं और अर्थियों पर लेटकर प्रदर्शन कर रहे हैं। 10 अप्रैल 2026 की रिपोर्ट के मुताबिक ढोड़न बांध विस्थापित महिलाओं ने अर्थी पर लेटकर कहा – “जमीन दो या जला दो”। 5 दिन तक हजारों आंदोलनकारी ढोड़न बांध निर्माण क्षेत्र में डटे रहे।
फंदा और चिता जैसे प्रतीक बताते हैं कि आदिवासी अब अपनी बात मनवाने के लिए *जान देने को तैयार हैं। जब SDM-तहसीलदार के सामने भी सुनवाई न हो, तो यह आखिरी रास्ता बचता है।
सरकारी दबाव का जवाब: प्रशासन ने दिल्ली जाने से रोका, राशन-पानी की आपूर्ति बाधित की, धारा 163 लगाकर आवाजाही बंद की। इसके जवाब में आंदोलनकारियों ने केन नदी के बीचोबीच आंदोलन शिफ |
