News by Azam lala
जिस ज़हर को कुछ लोग दवा की शीशी में छिपाकर नौजवानों की रगों तक पहुंचाने की कोशिश कर रहे थे, उस कारोबार पर एक बार फिर स्पेशल टास्क फोर्स (STF) ने ऐसा वार किया है कि नशे के सौदागरों में खलबली मच गई है।
भोपाल के मुबारकपुर एयरपोर्ट रोड इलाके में 30-31 मई की दरम्यानी रात STF ने एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम देते हुए लगभग 50 लाख रुपये कीमत की नशीली कफ सिरप बरामद की है। जब्त की गई खेप में ऑफ-कफ और ऑनरेक्स जैसी कफ सिरप शामिल हैं, जिनका इस्तेमाल कथित तौर पर नशे के लिए किया जाता है।
सूत्रों के मुताबिक यह सिर्फ सिरप की बोतलें नहीं थीं, बल्कि वह खामोश ज़हर था जो धीरे-धीरे युवाओं के भविष्य को निगलने की ताकत रखता है। STF की टीम ने गुप्त सूचना के आधार पर कार्रवाई करते हुए इस अवैध खेप को पकड़ लिया और पूरे नेटवर्क की तह तक पहुंचने की कवायद शुरू कर दी है।
नशे के सौदागरों पर लगातार दूसरा वार
दिलचस्प बात यह है कि यह कोई पहली कार्रवाई नहीं है। इससे पहले भी गांधी नगर इलाके में STF ने करीब डेढ़ करोड़ रुपये की नशीली कफ सिरप जब्त कर बड़े नेटवर्क का पर्दाफाश किया था। अब लगातार दूसरी बड़ी बरामदगी ने साफ कर दिया है कि राजधानी में नशे का कारोबार जड़ें जमाने की कोशिश कर रहा था, लेकिन जांच एजेंसियां भी पूरी मुस्तैदी से उसके पीछे लगी हुई हैं।
दवा या तबाही का कारोबार?
क्राइम एक्सपर्ट्स का मानना है कि नशीली कफ सिरप का अवैध कारोबार आज के दौर में ड्रग्स माफिया का नया हथियार बनता जा रहा है। मेडिकल उपयोग के लिए बनाई गई दवाओं का दुरुपयोग कर युवाओं को नशे की गिरफ्त में धकेला जाता है। यही वजह है कि ऐसी बरामदगियां केवल आर्थिक अपराध नहीं, बल्कि समाज की आने वाली नस्लों को बचाने की लड़ाई भी मानी जाती हैं।
भोपाल में लगातार हो रही STF की कार्रवाइयां इस बात का संकेत हैं कि नशे का नेटवर्क कहीं न कहीं संगठित तरीके से काम कर रहा है। लाखों और करोड़ों की खेप का पकड़ा जाना बताता है कि इसके पीछे सिर्फ छोटे तस्कर नहीं, बल्कि एक पूरा सप्लाई चैन सक्रिय हो सकता है।
मगर दूसरी तरफ यह भी हक़ीक़त है कि STF की लगातार कार्रवाई ने नशे के कारोबारियों की नींद उड़ा दी है। एक के बाद एक छापों ने यह पैगाम दे दिया है कि चाहे नशा दवा की बोतल में छिपा हो या किसी गोदाम के अंधेरे कोने में, कानून की नज़र आखिरकार वहां तक पहुंच ही जाती है।
भोपाल में इस वक्त जंग सिर्फ तस्करों और पुलिस के बीच नहीं, बल्कि एक शहर के भविष्य और नशे के कारोबार के बीच लड़ी जा रही है।
