जा़हिद खान की रिपोर्ट
भोपाल और आसपास के इलाकों में स्मार्ट मीटर लगाए जाने के बाद भी बिजली आपूर्ति की स्थिति को लेकर लोगों में नाराज़गी लगातार बढ़ती जा रही है। उपभोक्ताओं का कहना है कि तकनीक बदल गई है, लेकिन बिजली व्यवस्था आज भी पुराने ढर्रे पर ही चल रही है।
बारिश और हवा में गायब होती बिजली
स्थानीय लोगों के मुताबिक, हल्की बारिश या तेज हवा चलते ही कई इलाकों में बिजली सप्लाई बंद हो जाती है। कई बार तो स्थिति ऐसी बन जाती है कि बिजली घंटों तक बहाल नहीं होती, जिससे घरेलू कामकाज और छोटे व्यापार बुरी तरह प्रभावित होते हैं।
लोगों का कहना है कि यह समस्या हर मौसम में दोहराई जाती है, लेकिन इसका स्थायी समाधान अब तक नहीं निकल पाया है।
बिल समय पर, लेकिन सुविधा अधूरी
उपभोक्ताओं की सबसे बड़ी शिकायत यह है कि बिजली बिल समय पर और पूरी राशि के साथ वसूला जा रहा है। देर होने पर जुर्माना भी लगाया जाता है, लेकिन बदले में उन्हें लगातार और भरोसेमंद बिजली आपूर्ति नहीं मिल पा रही है।
स्थानीय लोगों का तंज है कि “मीटर तो स्मार्ट हो गया, बिल भी स्मार्ट हो गया, लेकिन बिजली अब भी अनिश्चित और अस्थिर है।”
स्मार्ट मीटर पर उठते सवाल
स्मार्ट मीटर लगाने का उद्देश्य बिजली खपत की पारदर्शिता और बेहतर प्रबंधन बताया गया था, लेकिन उपभोक्ताओं का सवाल है कि क्या यह व्यवस्था केवल बिलिंग सिस्टम को मजबूत करने तक ही सीमित रह गई है?
लोग पूछ रहे हैं कि जब मामूली मौसम बदलाव में भी सप्लाई बाधित हो जाती है, तो इस तकनीक का वास्तविक फायदा आम जनता को क्या मिल रहा है।
व्यवस्था पर बढ़ता असंतोष
बिजली कटौती से परेशान लोग यह भी कह रहे हैं कि पहले व्यवस्था को मजबूत करने की जरूरत थी, फिर स्मार्ट तकनीक लागू करनी चाहिए थी। उनका मानना है कि बिना बुनियादी ढांचे को सुधारें तकनीक लागू करने से समस्याएं कम होने के बजाय और उजागर हो रही हैं।
स्मार्ट मीटर को लेकर भले ही तकनीकी सुधार का दावा किया जा रहा हो, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि उपभोक्ता अभी भी नियमित और निर्बाध बिजली आपूर्ति का इंतजार कर रहे हैं। जनता का सवाल साफ है — “जब बिल स्मार्ट है, तो बिजली क्यों नहीं?”
