News by Azam lala
भोपाल देहात के थाना ईटखेड़ी इलाक़े में उस वक़्त एक दर्दनाक बेचैनी का माहौल बन गया, जब ग्राम अचारपुरा में तक़रीबन 3 साल का एक मासूम अपने परिजनों से बिछड़ गया। नन्हीं सी उम्र… डरी हुई आंखें… और ज़ुबान पर अपने घर का सही पता तक नहीं।
मासूम इधर-उधर भटक रहा था, जबकि उसके परिजन परेशान होकर उसे तलाश रहे थे। तभी किसी सजग नागरिक ने डायल-112 को सूचना दी। खबर मिलते ही डायल-112 में तैनात पुलिस जवान फ़ौरन मौके पर पहुंचे और बच्चे को अपने संरक्षण में लेकर उसके परिजनों की तलाश शुरू कर दी।
पुलिस जवानों ने सिर्फ़ ड्यूटी नहीं निभाई, बल्कि एक अभिभावक की तरह बच्चे को संभाला। आसपास के इलाक़ों में पूछताछ की गई, लोगों से जानकारी जुटाई गई और आख़िरकार मासूम की पहचान उसकी मां हर्जाना पति जाकिर अली निवासी तारीक भाई की फैक्ट्री, अचारपुरा के रूप में तस्दीक की गई।
जैसे ही मां ने अपने जिगर के टुकड़े को सुरक्षित देखा, उसकी आंखों में राहत के आंसू छलक उठे। वो पल वहां मौजूद हर शख़्स के लिए जज़्बाती बन गया।
उर्दू में कहते हैं —
“इंसानियत जब वर्दी पहन ले, तो ख़ौफ़ नहीं बल्कि भरोसा जन्म लेता है।”
डायल-112 ईटखेड़ी पुलिस की तत्परता, संवेदनशीलता और मानवीय रवैये ने एक बार फिर साबित कर दिया कि पुलिस सिर्फ़ कानून व्यवस्था का नाम नहीं, बल्कि मुश्किल वक़्त में लोगों का सहारा भी है।
आज जब अक्सर पुलिस की आलोचना सुर्खियों में रहती है, ऐसे नेक काम यह एहसास दिलाते हैं कि वर्दी के पीछे एक इंसानी दिल भी धड़कता है।
