Indonesia के पूर्वी हिस्से में स्थित सक्रिय Mount Dukono ज्वालामुखी में हुए भीषण विस्फोट ने इलाके में दहशत फैला दी है। शुक्रवार सुबह करीब 07:41 बजे हुए इस विस्फोट के बाद आसमान में लगभग 10 किलोमीटर ऊंचा राख और धुएं का विशाल गुबार उठता दिखाई दिया। विस्फोट इतना तेज था कि आसपास के कई इलाकों में राख फैल गई और दृश्यता भी प्रभावित हुई। स्थानीय प्रशासन ने तुरंत आपदा अलर्ट जारी करते हुए लोगों को प्रभावित क्षेत्र से दूर रहने की सलाह दी है।
पुलिस और राहत एजेंसियों के अनुसार इस हादसे में अब तक तीन पर्वतारोहियों की मौत की पुष्टि हुई है। मृतकों में दो Singapore के नागरिक और एक स्थानीय निवासी शामिल बताए गए हैं। शुरुआती रिपोर्ट में लगभग 20 लोगों के लापता होने की आशंका जताई गई थी, लेकिन बाद में बचाव दल ने 15 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया। घायलों को तत्काल अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उनका इलाज जारी है। राहत और बचाव अभियान अभी भी जारी है और प्रशासन बाकी लोगों की तलाश में जुटा हुआ है।
यह ज्वालामुखी Halmahera Island पर स्थित है और इंडोनेशिया के सबसे सक्रिय ज्वालामुखियों में गिना जाता है। अधिकारियों के मुताबिक जिस क्षेत्र में हादसा हुआ, उसे पहले ही “नो-गो ज़ोन” घोषित किया जा चुका था। ज्वालामुखी गतिविधि बढ़ने के कारण वहां पर्वतारोहण और आम लोगों के प्रवेश पर प्रतिबंध लगाया गया था। इसके बावजूद कुछ पर्वतारोहियों ने चेतावनी को नजरअंदाज करते हुए इलाके में प्रवेश किया, जिसके बाद यह दुखद हादसा हुआ।
विशेषज्ञों का कहना है कि इंडोनेशिया “रिंग ऑफ फायर” क्षेत्र में स्थित है, जहां टेक्टोनिक प्लेटों की गतिविधियां अत्यधिक सक्रिय रहती हैं। इसी कारण देश में अक्सर भूकंप और ज्वालामुखी विस्फोट जैसी प्राकृतिक घटनाएं होती रहती हैं। माउंट डुकोनो लंबे समय से सक्रिय रहा है और समय-समय पर राख और गैस उत्सर्जन की घटनाएं सामने आती रही हैं।
विस्फोट के बाद प्रशासन ने आसपास के गांवों के लोगों को सतर्क रहने और घरों से बाहर निकलते समय मास्क पहनने की सलाह दी है, क्योंकि हवा में फैली ज्वालामुखीय राख स्वास्थ्य के लिए खतरनाक हो सकती है। हवाई सेवाओं पर भी नजर रखी जा रही है, क्योंकि राख का गुबार विमान संचालन को प्रभावित कर सकता है।
इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि खतरनाक और प्रतिबंधित क्षेत्रों में सुरक्षा नियमों का पालन कितना जरूरी है। विशेषज्ञों का कहना है कि प्राकृतिक आपदा प्रभावित क्षेत्रों में जारी चेतावनियों को नजरअंदाज करना जानलेवा साबित हो सकता है।
न्यूज बाय: Raza Lala Khan
