News by Azam lala ✍️✍️
राजस्थान के भीलवाड़ा के शास्त्री नगर में हनुमान मंदिर के सामने बकरे के अवशेष क्या मिले, कुछ लोगों की “धर्म रक्षा सेवा” अचानक एक्टिव हो गई।
ऐसा लगा मानो इंसाफ़ नहीं, सीधे क़यामत आ गई हो।
सोशल मीडिया सूत्रों के हवाले से
ना जांच का इंतज़ार…
बस भगवा ग़ुस्सा फुल स्पीड में सड़क पर उतर आया।
“देखो… धर्म ख़तरे में है…”
मगर इस बार किस्मत ने स्क्रिप्ट पलट दी। जिस नाम के लिए ये नौटंकी की वो तो हम नाम निकला
पुलिस ने CCTV निकाला तो कहानी में “वो वाला एंगल” ही ग़ायब था जिसकी तलाश में कुछ लोग सुबह भगवा चोला ओढ़े धार्मिक नारे लगा कर गला फाड़ रहे थे।
जांच में सामने आया कि लोकेश खटीक और हेमंत कोली नाम के युवक, जो बकरों की खाल का कारोबार करते हैं, उन्हीं के बोरे से अवशेष गिरे या फेंके गए थे।
बस फिर क्या था…
जो लोग थोड़ी देर पहले “आस्था की जंग” लड़ रहे थे, वो अचानक “घर पर ज़रूरी काम” याद आने के बहाने खिसक लिए।
सड़क भी खुल गई…
ग़ुस्सा भी शांत हो गया…
और धर्म भी शायद वापस सुरक्षित महसूस करने लगा।
कमाल की बात ये है कि इन लोगों की आस्था भी नाम देखकर जगती है सनातनी सभ्यता ख़तरे में नजर आने लगती है
यानि दंगे का पेट्रोल पहले से तैयार रहता है, बस एक मुस्लिम नाम की माचिस चाहिए होती है।
आजकल कुछ स्वयंभू धर्म रक्षक ऐसे हो गए हैं जिन्हें मंदिर से ज़्यादा मोहब्बत दंगे की संभावना से होती है।
इनकी आस्था भगवान से कम और भीड़ की राजनीति से ज़्यादा जुड़ी दिखाई देती है।
गनीमत रही कि पुलिस ने वक़्त रहते सच सामने ला दिया, वरना वही लोग जो बाद में चुपचाप घर लौट गए, शहर का माहौल ख़राब करने में कोई कसर नहीं छोड़ते।
भीलवाड़ा पुलिस की कोतवाली टीम ने जांच कर पूरे मामले का खुलासा किया, जिसके बाद पुलिस अधीक्षक Sagar Rana ने टीम को सम्मानित किया।
“कुछ लोग हर घटना में मज़हब ढूंढ लेते हैं,
क्योंकि इंसानियत से उनका रिश्ता बहुत पहले टूट चुका होता है।”
