पन्ना, 8 मई 2026: मध्यप्रदेश के पन्ना जिले में प्रस्तावित रुंझ मझगाय डैम परियोजना को लेकर आदिवासी समाज का विरोध अब उग्र रूप लेता दिखाई दे रहा है। परियोजना के विरोध में आंदोलन कर रहे आदिवासी किसानों की गिरफ्तारी के बाद क्षेत्र में भारी आक्रोश फैल गया है। सैकड़ों की संख्या में आदिवासी महिला-पुरुष सड़कों पर उतर आए और प्रशासन के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने “डैम नहीं, जीवन चाहिए” और “जल-जंगल-जमीन हमारा अधिकार” जैसे नारे लगाते हुए सरकार पर आदिवासी समुदाय की अनदेखी करने का आरोप लगाया।
आंदोलनकारी आदिवासियों का कहना है कि रुंझ मझगाय डैम बनने से 50 से अधिक आदिवासी गांव डूब क्षेत्र में आ जाएंगे। इससे हजारों परिवारों के सामने विस्थापन का संकट खड़ा हो जाएगा। ग्रामीणों का आरोप है कि यह परियोजना केवल जमीन नहीं छीन रही, बल्कि उनकी संस्कृति, आजीविका और पीढ़ियों से जुड़े अस्तित्व को खत्म करने की कोशिश है। आदिवासी समाज का कहना है कि जंगल, जमीन और नदी ही उनकी जीवनरेखा हैं, और इन्हीं संसाधनों पर उनका पूरा जीवन निर्भर है।
प्रदर्शन कर रहे ग्रामीणों के अनुसार पिछले तीन दिनों से आदिवासी किसान शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगों को उठा रहे थे। धरना-प्रदर्शन और ज्ञापन के माध्यम से प्रशासन तक अपनी बात पहुंचाने की कोशिश की जा रही थी, लेकिन इसके बावजूद पुलिस ने आंदोलन में शामिल करीब 20 आदिवासी किसानों को गिरफ्तार कर लिया। किसानों की गिरफ्तारी की खबर फैलते ही क्षेत्र में तनाव बढ़ गया और आदिवासी समाज का गुस्सा सड़कों पर दिखाई देने लगा।
गिरफ्तारी के विरोध में आदिवासी समाज ने पन्ना-अमाजगंज मार्ग पर चक्का जाम कर दिया। सड़क पर बैठे प्रदर्शनकारियों ने प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए गिरफ्तार किसानों की तत्काल रिहाई की मांग की। सड़क जाम होने से मार्ग पर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं और यातायात व्यवस्था प्रभावित हुई। प्रदर्शन में बड़ी संख्या में महिलाएं भी शामिल रहीं, जिन्होंने कहा कि सरकार विकास के नाम पर आदिवासियों को उनके घरों से बेघर कर रही है।
आदिवासी नेताओं का आरोप है कि बिना सहमति और उचित पुनर्वास योजना के डैम परियोजना को आगे बढ़ाया जा रहा है। उनका कहना है कि जिन परिवारों की जमीन और घर डूब क्षेत्र में आएंगे, उन्हें अब तक स्पष्ट पुनर्वास नीति नहीं बताई गई है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि जब उन्होंने अपने अधिकारों के लिए आवाज उठाई तो उन्हें दबाने के लिए पुलिस कार्रवाई की गई। प्रदर्शनकारियों ने कहा, “हमारा घर-मकान छीना जा रहा है, हमें अपनी जमीन से बेदखल किया जा रहा है। क्या अपने हक की बात करना जुर्म है?”
प्रदर्शन के दौरान आदिवासी संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भी आंदोलन को समर्थन दिया। उन्होंने सरकार से मांग की कि गिरफ्तार किसानों को तुरंत रिहा किया जाए और परियोजना पर पुनर्विचार किया जाए। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगें नहीं मानी गईं तो आंदोलन और तेज किया जाएगा।
फिलहाल क्षेत्र में पुलिस बल तैनात है और प्रशासन स्थिति पर नजर बनाए हुए है। हालांकि आदिवासी समाज का कहना है कि जब तक किसानों की रिहाई और डैम परियोजना पर स्पष्ट निर्णय नहीं लिया जाता, उनका आंदोलन जारी रहेगा।
न्यूज बाय
अनुराधा दुबे
