Bhopal के हथाईखेड़ा इलाके में गुरुवार 7 मई को उस समय तनाव की स्थिति बन गई, जब सिविल अस्पताल के पास स्थित एक खाली प्लॉट पर कब्रिस्तान का बोर्ड लगाए जाने को लेकर दो समुदाय आमने-सामने आ गए। देखते ही देखते मामला इतना बढ़ गया कि प्रदर्शनकारियों ने राष्ट्रीय राजमार्ग NH-46 पर जाम लगा दिया। प्रशासन को हालात संभालने के लिए भारी पुलिस बल तैनात करना पड़ा।
जानकारी के अनुसार, Vishwa Hindu Parishad (VHP) के कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि जिस जमीन पर कब्रिस्तान का बोर्ड लगाया गया, वह सरकारी भूमि है और वर्षों से हिंदू तथा बौद्ध समाज के बच्चों को दफनाने के लिए उपयोग में लाई जाती रही है। संगठन का दावा है कि हाल ही में वहां तीन मुस्लिम शव दफनाए गए, जिसके बाद कब्रिस्तान का बोर्ड लगाकर जमीन पर स्थायी दावा जताने की कोशिश की गई। विरोध में VHP कार्यकर्ताओं ने मौके पर पहुंचकर बोर्ड उखाड़ दिया और “जगह नहीं देंगे” के नारे लगाते हुए सड़क पर प्रदर्शन शुरू कर दिया।
प्रदर्शन के कारण कुछ समय के लिए NH-46 पर यातायात प्रभावित रहा। मौके पर पहुंचे पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों को समझाने का प्रयास किया और स्थिति को नियंत्रण में लिया। एहतियात के तौर पर इलाके में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया ताकि किसी भी अप्रिय घटना को रोका जा सके।
दूसरी ओर मुस्लिम त्योहार कमेटी ने VHP के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि भोपाल में कब्रिस्तानों की संख्या लगातार घटती जा रही है। कमेटी के अनुसार, एक समय शहर में 189 कब्रिस्तान थे, लेकिन अतिक्रमण और सरकारी परियोजनाओं के कारण अब केवल 23 ही बचे हैं। उनका आरोप है कि 166 कब्रिस्तानों की जमीन या तो कब्जों में चली गई या अन्य निर्माण कार्यों में इस्तेमाल हो गई। कमेटी का कहना है कि शहर में दफनाने के लिए पर्याप्त जगह नहीं बची है और यदि प्रशासन वैकल्पिक व्यवस्था नहीं करता, तो मजबूरी में श्मशान भूमि में दफनाने की अनुमति देनी पड़ेगी।
विवाद के बीच प्रशासन ने मामले की जांच शुरू कर दी है। SDM Ravish Srivastava ने दोनों पक्षों को 23 सितंबर को भूमि संबंधी दस्तावेजों के साथ उपस्थित होने के निर्देश दिए हैं। प्रशासन का कहना है कि जमीन का वास्तविक मालिकाना हक रिकॉर्ड और दस्तावेजों के आधार पर तय किया जाएगा। तब तक क्षेत्र में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस निगरानी जारी रहेगी।
यह विवाद केवल हथाईखेड़ा तक सीमित नहीं माना जा रहा, बल्कि भोपाल में लंबे समय से चल रहे जमीन और कब्रिस्तान संबंधी विवादों की कड़ी के रूप में देखा जा रहा है। शहर में पहले भी कई संवेदनशील मामले सामने आ चुके हैं, जिनमें बड़ाबाग कब्रिस्तान के नीचे से गुजर रही मेट्रो लाइन, अकबरपुर इलाके में कब्रिस्तान की जमीन पर गौशाला निर्माण और PHQ की जमीन पर वक्फ बोर्ड के दावों को लेकर कानूनी विवाद शामिल हैं। इन मामलों ने धार्मिक स्थलों, सरकारी जमीन और प्रशासनिक निर्णयों को लेकर बहस को और गहरा कर दिया है।
फिलहाल प्रशासन दोनों पक्षों से शांति बनाए रखने की अपील कर रहा है। हालांकि स्थानीय स्तर पर माहौल अभी भी संवेदनशील बना हुआ है और सभी की नजर अब SDM जांच और राजस्व रिकॉर्ड के अंतिम निष्कर्ष पर टिकी हुई है।
न्यूज बाय: Sabiha Khan
