News by Azam lala ✍️✍️
रायपुर की उस रात ने एक बाप की मोहब्बत को ख़ून में डुबो दिया… जिस बेटे को सीने से लगाकर बड़ा किया, जिसके लिए अपनी भूख, अपनी ख्वाहिशें और अपनी नींद तक कुर्बान कर दी… उसी बेटे के हाथों बाप की सांसें थम गईं। तिल्दा नेवरा के वार्ड नंबर 04 में रहने वाले संतू कोठारी ने शायद कभी ख्वाब में भी नहीं सोचा होगा कि जिस औलाद को उंगली पकड़कर चलना सिखाया, वही एक दिन लकड़ी के डंडे से उनकी जिंदगी छीन लेगी।
कहते हैं बाप की मोहब्बत समंदर जैसी होती है… औलाद चाहे जितनी गलतियाँ करे, बाप हर बार उसे सीने से लगा लेता है। मगर उस रात शराब और गुस्से ने रिश्तों की सारी हदें तोड़ दीं। घर में दोस्तों के साथ शराब पीने को लेकर शुरू हुआ मामूली झगड़ा देखते ही देखते खूनी मंज़र में बदल गया। बाप समझा रहा था… रोक रहा था… शायद डांट भी रहा होगा, क्योंकि हर बाप अपने बेटे को बर्बादी की राह पर नहीं देख सकता। लेकिन बेटे के सर पर ऐसा जुनून और हैवानियत सवार हुई कि उसने लकड़ी का डंडा उठाकर अपने ही पिता पर वार करना शुरू कर दिया।
हर वार के साथ एक बाप का भरोसा टूटता गया हर चोट के साथ वो तमाम कुर्बानियां दम तोड़ती रहीं जो उसने बेटे के लिए दी थीं। जिस हाथ से कभी बेटे के सिर पर मोहब्बत रखी थी, वही हाथ उस रात खुद को बचाने के लिए कांप रहे थे मगर मौत बेरहम बनकर सामने खड़ी थी। संतू कोठारी ज़मीन पर गिर पड़े घर की दीवारें चीखती रहीं… मगर बेटे का गुस्सा नहीं रुका। और जब सांसें थम गईं, तब शायद उसे एहसास हुआ कि उसने सिर्फ एक इंसान नहीं, अपने ही घर की छांव को खत्म कर दिया है।
वारदात के बाद आरोपी ने खून के निशान मिटाने की कोशिश की, शव को खाट पर लिटा दिया… मगर सच कब छुपता है? पुलिस पहुंची, पूछताछ हुई और आखिरकार बेटे ने अपना जुर्म कबूल कर लिया।
आज एक बाप कब्र की खामोशी में सो गया… और एक बेटा सलाखों के पीछे अपनी हैवानियत का बोझ उठा रहा है। जिस बाप ने खुद भूखा रहकर औलाद को खिलाया, उसी औलाद ने एक दिन उसका जनाज़ा उठवाया |
“रिश्ते मोहब्बत से जिंदा रहते हैं साहब,
जब गुस्सा इंसान पर हावी हो जाए तो अपना भी पराया बन जाता है…”
