ईस्ट दिल्ली में हुई सहायक प्रोफेसर देवोस्मिता पॉल की हत्या निकली सुनियोजित वारदात, 1200 किलोमीटर दूर से आए आरोपियों ने दिया था घटना को अंजाम |
नई दिल्ली। दिल्ली विश्वविद्यालय (DU) की सहायक प्रोफेसर देवोस्मिता पॉल की मौत के मामले में दिल्ली पुलिस ने बड़ा खुलासा करते हुए इसे एक सुनियोजित हत्या करार दिया है। शुरुआती तौर पर संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत की जांच के दौरान सामने आया कि यह कोई हादसा नहीं, बल्कि पुश्तैनी संपत्ति पर कब्जा बनाए रखने के उद्देश्य से रची गई एक सोची-समझी साजिश थी।
पुलिस जांच के अनुसार, 3 जून को पूर्वी दिल्ली स्थित अपने फ्लैट में मृत पाई गईं 49 वर्षीय प्रोफेसर देवोस्मिता पॉल की हत्या पश्चिम बंगाल के बर्धमान जिले से आए आरोपियों ने की थी। मामले में रामप्रसाद दास, उनकी पत्नी बनाश्री दास सहित तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस ने सभी आरोपियों को पश्चिम बंगाल से हिरासत में लिया है।
करोड़ों की पुश्तैनी संपत्ति बनी हत्या की वजह
जांच में सामने आया है कि आरोपी लंबे समय से देवोस्मिता पॉल के नाना की करोड़ों रुपये मूल्य की पुश्तैनी संपत्ति पर कब्जा जमाए हुए थे। प्रोफेसर पॉल इस संपत्ति को कानूनी प्रक्रिया के तहत खाली करवाने और अपने अधिकार स्थापित करने की कोशिश कर रही थीं। इसी वजह से आरोपियों ने उन्हें रास्ते से हटाने की साजिश रची।
पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, आरोपियों ने योजना बनाकर करीब 1200 किलोमीटर की यात्रा कर पश्चिम बंगाल से दिल्ली पहुंचकर वारदात को अंजाम दिया और कुछ ही घंटों के भीतर वापस लौट गए, ताकि किसी को उन पर शक न हो।
सीसीटीवी फुटेज से खुली साजिश की परतें
मामले की जांच के दौरान पुलिस को अपार्टमेंट परिसर और आसपास के क्षेत्रों के सीसीटीवी कैमरों की फुटेज में तीन संदिग्ध व्यक्ति दिखाई दिए, जिन्होंने अपने चेहरे मास्क से ढक रखे थे। शुरुआत में उनकी पहचान नहीं हो सकी, लेकिन पुलिस ने तकनीकी जांच, मोबाइल फोन लोकेशन, रेलवे टिकटों और यात्रा रिकॉर्ड की मदद से उनकी गतिविधियों का पता लगाया।
सीसीटीवी फुटेज और डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर जांच टीम पश्चिम बंगाल तक पहुंची और वहां से आरोपियों को गिरफ्तार करने में सफलता हासिल की।
बहु-राज्यीय जांच के बाद मिली सफलता
दिल्ली पुलिस ने इस मामले को सुलझाने के लिए विशेष जांच टीम (SIT) का गठन किया था। जांच में दिल्ली और पश्चिम बंगाल पुलिस के बीच समन्वय स्थापित किया गया। कई दिनों तक चली तकनीकी और फील्ड जांच के बाद आरोपियों की पहचान हुई और उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया।
पुलिस का कहना है कि हत्या पूरी तरह पूर्व नियोजित थी और आरोपियों ने वारदात के बाद साक्ष्य मिटाने तथा पहचान छिपाने की भी कोशिश की थी। हालांकि जांच एजेंसियों ने उपलब्ध तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर पूरे घटनाक्रम का खुलासा कर दिया।
शिक्षा जगत में शोक और आक्रोश
देवोस्मिता पॉल दिल्ली विश्वविद्यालय में सहायक प्रोफेसर के पद पर कार्यरत थीं और शिक्षण क्षेत्र में उनकी पहचान एक समर्पित शिक्षिका के रूप में थी। उनकी हत्या की खबर से विश्वविद्यालय समुदाय में शोक और आक्रोश का माहौल है। शिक्षकों और छात्रों ने मामले में दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
फिलहाल पुलिस आरोपियों से पूछताछ कर रही है और यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि हत्या की योजना में अन्य लोग भी शामिल थे या नहीं। मामले की आगे की जांच जारी है।
