तमिलनाडु के थेनी जिले के निवासी लांस नायक ए. मीनाक्षी सुंदरम इन दिनों पूरे देश के लिए प्रेरणा का प्रतीक बने हुए हैं। भारतीय सेना के इस वीर जवान को जम्मू-कश्मीर के कुलगाम में आतंकवाद विरोधी अभियान के दौरान असाधारण साहस और कर्तव्यनिष्ठा के लिए देश के दूसरे सर्वोच्च शांतिकालीन वीरता पुरस्कार किरती चक्र से सम्मानित किया गया है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने 8 जून को आयोजित रक्षा अलंकरण समारोह में उन्हें यह प्रतिष्ठित सम्मान प्रदान किया।

दिसंबर 2024 में कुलगाम जिले में सुरक्षा बलों और आतंकवादियों के बीच हुई भीषण मुठभेड़ के दौरान मीनाक्षी सुंदरम अग्रिम मोर्चे पर तैनात थे। ऑपरेशन के दौरान उनके चेहरे और कंधे में गोलियां लगीं, लेकिन गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद उन्होंने पीछे हटने से इनकार कर दिया। उन्होंने बहादुरी से मुकाबला जारी रखा और एक आतंकवादी को ढेर कर ऑपरेशन की सफलता में अहम भूमिका निभाई। सेना के अधिकारियों के अनुसार, उनकी सूझबूझ, साहस और कर्तव्य के प्रति समर्पण ने साथी जवानों का मनोबल बढ़ाया और मिशन को सफल बनाया।
उनकी वीरता के सम्मान में सोमवार को चेन्नई में तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन ने विशेष समारोह आयोजित कर उन्हें सम्मानित किया। मुख्यमंत्री ने उन्हें ₹48 लाख की प्रोत्साहन राशि का चेक सौंपा और पारंपरिक शॉल ओढ़ाकर सम्मान व्यक्त किया। इस दौरान उनकी पत्नी, छोटे बच्चे, परिवार के सदस्य और वरिष्ठ प्रशासनिक व सैन्य अधिकारी भी मौजूद रहे। मुख्यमंत्री ने कहा कि मीनाक्षी सुंदरम जैसे वीर जवान पूरे देश के लिए गर्व और प्रेरणा के स्रोत हैं।

राष्ट्रपति से सम्मान प्राप्त करने के बाद जब मीनाक्षी सुंदरम अपने गृह जिले थेनी पहुंचे, तो स्थानीय लोगों ने उनका भव्य स्वागत किया। हजारों लोगों ने सड़कों पर उतरकर उनका अभिनंदन किया और देशभक्ति के नारों के साथ उन्हें सम्मान दिया। उनके गांव में यह अवसर किसी उत्सव से कम नहीं था।
मीनाक्षी सुंदरम की यह कहानी केवल व्यक्तिगत वीरता की नहीं, बल्कि भारतीय सेना के उस जज्बे की भी मिसाल है, जिसमें देश की सुरक्षा सर्वोपरि होती है। उनका साहस आने वाली पीढ़ियों को देशसेवा, कर्तव्यनिष्ठा और राष्ट्रभक्ति के लिए प्रेरित करता रहेगा।
