New Delhi में चुनाव परिणामों के बाद अब वोटर लिस्ट को लेकर नया राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। विपक्षी दलों ने आरोप लगाया है कि देशभर की कई सीटों पर मतदाता सूची से बड़े पैमाने पर नाम हटाए गए, जिसका असर चुनाव परिणामों पर पड़ा। विपक्ष का दावा है कि करीब 150 लोकसभा सीटों पर Bharatiya Janata Party (BJP) की जीत का अंतर उन वोटरों की संख्या से भी कम था, जिनके नाम कथित रूप से वोटर लिस्ट से हटाए गए।
Indian National Congress ने इस मुद्दे को “लोकतंत्र की हत्या” बताते हुए चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल खड़े किए हैं। कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि लगभग 90 लाख मतदाताओं के नाम बिना स्पष्ट कारण के सूची से गायब कर दिए गए। पार्टी ने कहा कि चुनाव आयोग को सार्वजनिक रूप से बताना चाहिए कि इतने बड़े पैमाने पर नाम क्यों हटाए गए और किन मानकों के आधार पर यह कार्रवाई की गई। कांग्रेस का कहना है कि यदि किसी मतदाता का नाम हटाया जाता है तो उसे पहले सूचना और सुधार का अवसर मिलना चाहिए।
वहीं All India Trinamool Congress (TMC) ने भी गंभीर आरोप लगाए हैं। पार्टी का कहना है कि विशेष रूप से West Bengal में मतदाता सूची में छेड़छाड़ की गई। TMC नेताओं ने दावा किया कि “बिना वोट काटे BJP बंगाल में अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत नहीं कर सकती।” विपक्षी दलों का आरोप है कि मतदाता सूची संशोधन की प्रक्रिया का इस्तेमाल चुनिंदा क्षेत्रों और वर्गों को प्रभावित करने के लिए किया गया।
हालांकि BJP ने इन आरोपों को पूरी तरह खारिज करते हुए विपक्ष पर हार की निराशा में माहौल बनाने का आरोप लगाया है। पार्टी नेताओं का कहना है कि मतदाता सूची में नाम जोड़ना और हटाना चुनाव आयोग की नियमित और कानूनी प्रक्रिया का हिस्सा है। BJP का कहना है कि हर चुनाव से पहले मृत मतदाताओं, डुप्लीकेट नामों और स्थानांतरित हो चुके लोगों के नाम हटाए जाते हैं ताकि सूची को अपडेट रखा जा सके। पार्टी ने विपक्ष के आरोपों को “राजनीतिक प्रोपेगेंडा” बताया है।
इस पूरे विवाद के बीच Election Commission of India ने आंकड़े जारी कर स्थिति स्पष्ट करने की कोशिश की है। आयोग के अनुसार वर्ष 2025 में देशभर में करीब 2.1 करोड़ नाम मतदाता सूची से हटाए गए, जबकि 2.7 करोड़ नए मतदाता जोड़े गए। आयोग का कहना है कि कुल मिलाकर देश में लगभग 60 लाख नए मतदाता बढ़े हैं, इसलिए यह कहना गलत होगा कि बड़े पैमाने पर मतदाताओं को अधिकार से वंचित किया गया।
फिर भी विपक्ष इस स्पष्टीकरण से संतुष्ट नहीं दिखाई दे रहा। सूत्रों के मुताबिक कई विपक्षी दल अब इस मुद्दे को लेकर Supreme Court of India जाने की तैयारी कर रहे हैं। विपक्ष की मांग है कि वोटर लिस्ट संशोधन प्रक्रिया की स्वतंत्र जांच कराई जाए और यह सुनिश्चित किया जाए कि किसी भी पात्र नागरिक का नाम बिना उचित कारण सूची से न हटे।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले महीनों में यह मुद्दा राष्ट्रीय राजनीति में बड़ा विवाद बन सकता है। वोटर लिस्ट की पारदर्शिता और चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता को लेकर बहस तेज होने की संभावना है, क्योंकि लोकतंत्र की विश्वसनीयता सीधे मतदाता सूची की शुद्धता और निष्पक्षता से जुड़ी मानी जाती है।
न्यूज बाय: Anuradha Dubey
