Delhi Development Authority ने Mangolpuri इलाके में स्थित चर्चित पंचपीर दरगाह पर मंगलवार, 6 मई को बड़ी कार्रवाई करते हुए बुलडोजर चला दिया। भारी पुलिस बल और प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी में हुई इस कार्रवाई के दौरान दरगाह से जुड़ी संरचनाओं को हटाया गया। DDA का कहना है कि यह निर्माण सरकारी जमीन पर अवैध कब्जे के रूप में खड़ा किया गया था और संबंधित पक्षों को पहले कई बार नोटिस भी जारी किए गए थे, लेकिन वैध दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किए गए।
प्रशासन के अनुसार कार्रवाई में करीब 1000 गज से अधिक सार्वजनिक जमीन को कब्जा मुक्त कराया गया है, जिसकी बाजार कीमत करोड़ों रुपये बताई जा रही है। अधिकारियों का दावा है कि यह जमीन सरकारी रिकॉर्ड में सार्वजनिक उपयोग के लिए दर्ज थी, लेकिन वर्षों से उस पर धार्मिक ढांचे और अन्य निर्माण मौजूद थे। DDA ने इसे “अतिक्रमण हटाओ अभियान” का हिस्सा बताते हुए कहा कि राजधानी में सरकारी जमीनों पर अवैध कब्जों के खिलाफ लगातार अभियान चलाया जा रहा है।
वहीं स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं में इस कार्रवाई को लेकर भारी नाराजगी देखने को मिली। क्षेत्र के लोगों का कहना है कि पंचपीर दरगाह करीब 200 साल पुरानी आस्था का केंद्र रही है, जहां हर धर्म और समुदाय के लोग माथा टेकने आते थे। लोगों का आरोप है कि प्रशासन ने बिना पर्याप्त संवाद और वैकल्पिक व्यवस्था के अचानक कार्रवाई कर धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाई है। मौके पर तनाव की स्थिति को देखते हुए बड़ी संख्या में पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई थी।
दिल्ली में पिछले एक वर्ष के दौरान Municipal Corporation of Delhi और DDA द्वारा मंदिर, मस्जिद, मजार और अन्य धार्मिक ढांचों पर अवैध निर्माण के खिलाफ अभियान तेज किया गया है। कई इलाकों में अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई हो चुकी है, लेकिन हर बार यह सवाल उठता रहा है कि यदि निर्माण अवैध थे तो दशकों तक संबंधित विभाग चुप क्यों रहे। स्थानीय लोगों का कहना है कि वर्षों तक बिजली, पानी और अन्य सुविधाएं मिलने के बाद अचानक किसी ढांचे को अवैध घोषित कर देना प्रशासनिक लापरवाही को भी उजागर करता है।
इस कार्रवाई के बाद अब बहस केवल अतिक्रमण हटाने तक सीमित नहीं है, बल्कि सरकारी एजेंसियों की कार्यप्रणाली और निष्पक्षता पर भी सवाल उठ रहे हैं। आलोचकों का कहना है कि जब तक नियमों का पालन हर धर्म और हर वर्ग पर समान रूप से नहीं होगा, तब तक ऐसी कार्रवाइयों पर “टारगेटेड कार्रवाई” का आरोप लगता रहेगा। वहीं आम लोगों के मन में यह सवाल भी बना हुआ है कि कब्जा मुक्त कराई गई इस बहुमूल्य जमीन का उपयोग वास्तव में सार्वजनिक हित में होगा या मामला केवल सरकारी रिकॉर्ड और फाइलों तक ही सीमित रह जाएगा।
न्यूज बाय: Sabiha Khan
