ठाणे के मुंब्रा से AIMIM (All India Majlis-e-Ittehad-ul-Muslimeen) की पार्षद सहर शेख के खिलाफ जाति प्रमाण पत्र को लेकर चल रही जांच में कई गंभीर खुलासे हुए हैं। तहसीलदार उमेश पाटिल की जांच रिपोर्ट के आधार पर सहर शेख का नगरसेवक पद अब रद्द होने की कगार पर है।
इस मामले की मुख्य जानकारी नीचे दी गई है:
जांच रिपोर्ट के मुख्य बिंदु
तहसीलदार उमेश पाटिल की रिपोर्ट में सहर शेख के जाति प्रमाण पत्र को लेकर निम्नलिखित अनियमितताएं पाई गई हैं:
फर्जी प्रमाण पत्र: जांच के मुताबिक, सहर शेख ने जो OBC जाति प्रमाण पत्र चुनाव के दौरान जमा किया था, वह अवैध पाया गया है।
क्षेत्राधिकार का उल्लंघन: सहर शेख का परिवार ठाणे का निवासी है, लेकिन उन्होंने अपना जाति प्रमाण पत्र मुंबई सिटी कलेक्टर कार्यालय से बनवाया था, जिसे स्थानीय जांच से बचने का प्रयास माना जा रहा है।
पिता के दस्तावेज भी अवैध: रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि उनके पिता, यूनुस इकबाल शेख, द्वारा 2011 में बनवाया गया OBC प्रमाण पत्र भी निर्धारित प्रारूप में नहीं था और उस पर आवश्यक हस्ताक्षर नहीं थे।
उत्तर प्रदेश कनेक्शन: जांच में पता चला कि उनके पिता और चाचा मूलतः उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद के निवासी हैं। नियमों के अनुसार, प्रवासियों के लिए ‘फॉर्म-10’ लागू होता है, लेकिन उन्होंने स्थानीय निवासियों के लिए आरक्षित ‘फॉर्म-8’ का इस्तेमाल कर अधिकारियों को गुमराह किया।
आगे की कार्रवाई
FIR की सिफारिश: तहसीलदार ने सहर शेख के पिता यूनुस शेख के खिलाफ धोखाधड़ी और जालसाजी के लिए आपराधिक मामला (FIR) दर्ज करने की सिफारिश की है।
पद का खतरा: यदि अंतिम निर्णय में प्रमाण पत्र पूरी तरह रद्द हो जाता है, तो सहर शेख को अयोग्य घोषित किया जा सकता है और उनका नगरसेवक पद चला जाएगा।
शिकायतकर्ता: यह पूरी जांच एनसीपी (NCP) की प्रतिद्वंद्वी उम्मीदवार सिद्दीकी फरहा शवाब अहमद द्वारा दायर शिकायत के बाद शुरू हुई थी।
राजनीतिक संदर्भ
सहर शेख जनवरी 2026 के ठाणे नगर निगम (TMC) चुनावों में जीत के बाद सुर्खियों में आई थीं, जब उन्होंने जीत के बाद ‘कैसे हराया’ वाले बयान के साथ स्थानीय राजनीति में हलचल मचा दी थी। वर्तमान में, खबरें हैं कि विवाद बढ़ने के बाद से वे और उनके पिता ‘नॉट रिचेबल’ हैं।
न्यूज़ बाय
रज़ा लाला ख़ान