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भोपाल में इंसानियत की मिसाल: आश्रय गृह में गूंजी शहनाई, मां-बेटी को मिला नया परिवार |

निर्भया महिला आश्रय गृह में अनोखी शादी, बिना खून के रिश्तों ने निभाया हर फर्ज; बच्ची के पहले जन्मदिन पर मां की नई शुरुआत |

भोपाल के निर्भया महिला आश्रय गृह में एक ऐसी शादी संपन्न हुई, जिसने इंसानियत, अपनापन और सामाजिक जिम्मेदारी की नई मिसाल पेश की। यहां रह रही पूजा राजपाली ने मुरली काछी के साथ सात फेरे लेकर अपनी जिंदगी की नई शुरुआत की। यह शादी इसलिए खास रही क्योंकि यह सिर्फ दो लोगों का मिलन नहीं, बल्कि संघर्ष, सहारे और रिश्तों की नई परिभाषा का प्रतीक बनी।

जब पूजा आश्रय गृह पहुंची थीं, तब वह अकेली नहीं थीं, बल्कि उनकी गोद में एक नन्ही बच्ची भी थी। पिछले 18 महीनों से आश्रय गृह ने मां-बेटी को सहारा दिया और हर मुश्किल में साथ खड़ा रहा। संयोग से 15 अप्रैल को उस बच्ची का पहला जन्मदिन भी था, जिससे यह दिन और भी खास बन गया—एक ओर मां की नई जिंदगी की शुरुआत हुई, तो दूसरी ओर बेटी के जीवन का पहला साल पूरा हुआ।

इस शादी की सबसे खास बात यह रही कि इसमें खून के रिश्तों की जगह दिल से जुड़े रिश्तों ने सभी जिम्मेदारियां निभाईं। पूजा की इच्छा पर शेर अफ़ज़ल खान और समर खान ने माता-पिता बनकर कन्यादान की रस्म अदा की। शादी की हर परंपरा—हल्दी, मेहंदी से लेकर फेरे और विदाई तक—पूरी गरिमा और सम्मान के साथ निभाई गई।

विदाई के समय भावनात्मक माहौल बन गया, जब मुब्सिरा खान ने बुआ का फर्ज निभाते हुए दुल्हन को चांदी की बिछिया पहनाई। दूल्हा-दुल्हन को नए जीवन के लिए आवश्यक सामान भी दिया गया, ताकि वे अपनी नई शुरुआत मजबूती से कर सकें।

निर्भया महिला आश्रय गृह पहले भी ऐसी पहल कर चुका है और अब तक 8 बेसहारा महिलाओं की शादी करवा चुका है। खास तौर पर शेर अफ़ज़ल खान और समर खान ने 8 हिंदू बेटियों का कन्यादान कर सामाजिक सद्भाव और भाईचारे की अनूठी मिसाल पेश की है।

भोपाल से सामने आई यह कहानी यह संदेश देती है कि रिश्ते केवल खून से नहीं, बल्कि प्यार, जिम्मेदारी और अपनापन से बनते हैं—और यही असली इंसानियत है।

न्यूज बाय
Azam lala

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