संवाददाता : Azam lala
आसपास के लोगों से बातचीत के आधार पर घड़ी 10 जून की रात लगभग 9 बजे का वक़्त दिखा रही थी। आरिफ नगर पानी की टंकी के पास मौजूद वह खाली मैदान, जो दिन में बच्चों की खेलकूद और किलकारियों का गवाह बनता है, रात होते ही अंधेरे और असामाजिक तत्वों की महफ़िल का अड्डा बन जाता है।
घनी आबादी के बीच स्थित इस मैदान में न पर्याप्त रोशनी का इंतज़ाम है और न ही रात के समय प्रभावी निगरानी। स्थानीय लोगों का आरोप है कि अंधेरे का फायदा उठाकर नशेड़ी, शराबी और आपराधिक प्रवृत्ति के लोग यहां डेरा जमाए रहते हैं। इसी मैदान में एक ऐसी घटना सामने आई जिसने इंसानियत को झकझोर कर रख दिया।
स्थानीय लोगों के मुताबिक एक बेज़ुबान कुत्ते को कथित तौर पर ज़िंदा जलाकर मार दिया गया। वह जानवर, जिसे लोग आम तौर पर कुत्ता या डॉग कहकर पुकारते हैं, इस हैवानियत का शिकार बन गया। यदि यह आरोप सही हैं, तो यह केवल पशु क्रूरता का मामला नहीं बल्कि समाज के लिए एक गंभीर चेतावनी भी है।
जब न्यूज़ 100 की टीम मौके पर पहुंची तो मैदान चारों तरफ अंधेरे में डूबा दिखाई दिया। हालात ऐसे थे कि कुछ दूरी पर खड़ा व्यक्ति भी साफ नज़र नहीं आ रहा था। कुछ दूर टिमटिमाती रोशनियां दिखाई दे रही थीं करीब जाने पर पता चला कुछ लोग चिलम फुक रहे है मैदान के अलग-अलग हिस्सों में लोगों के समूह आकृतियाँ नजर आ रही थी और अर्ध जले कुत्ते के अवशेष
घटना की जानकारी मिलने पर आरम्भ पथ वेलफेयर सोसाइटी की पशु प्रेमी अनम जाह भी मौके पर पहुंचीं। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को सूचना देने के साथ पशु के शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजने की मांग की। उनका कहना है कि इस घटना ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
आरम्भ पथ वेलफेयर सोसाइटी की पशु प्रेमी अनम जाह का कहना है कि मैदान के चारों ओर दीवार तो खड़ी कर दी गई, लेकिन रोशनी की व्यवस्था नहीं की गई। यही वजह है कि यह स्थान असामाजिक तत्वों की पनाहगाह बनता जा रहा है। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि आज इस बेज़ुबान जानवर की जगह कोई बच्चा या बच्ची होती, तो क्या तब भी व्यवस्था इतनी ही खामोश रहती?
उनका कहना है कि अपराधी न धर्म देखते हैं, न इंसान और न जानवर। अपराधी सिर्फ मौक़ा देखते हैं। आज एक बेज़ुबान जानवर शिकार बना है, कल कोई मासूम इंसान भी ऐसी वारदात का शिकार हो सकता है।
उन्होंने मांग की कि जिस तरह हत्या के मामलों में पुलिस आरोपियों की तलाश कर उन्हें कानून के दायरे में लाती है, उसी तरह इस मामले की भी गंभीर जांच हो और यदि आरोप सिद्ध होते हैं तो दोषियों के खिलाफ पशु क्रूरता और अन्य लागू धाराओं के तहत सख्त कार्रवाई की जाए।
साथ ही उन्होंने क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों, विशेष रूप से आतिफ अकील से मैदान में पर्याप्त स्ट्रीट लाइट लगाने और सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की मांग की, ताकि स्थानीय नागरिकों की निगाह हर गतिविधि पर बनी रहे और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
यह घटना केवल एक बेज़ुबान की मौत की कहानी नहीं है, बल्कि उस लापरवाही की दास्तान भी है जो अंधेरे में पनपते अपराधों को मौक़ा देती है। सवाल अब भी वही है—क्या किसी बड़े हादसे का इंतज़ार किया जाएगा, या फिर समय रहते इस मैदान को बच्चों के खेल का मैदान ही बनाए रखने के लिए ठोस कदम उठाए जाएंगे?
