1984 के सिख दंगों को लेकर एक बार फिर सियासत तेज हो गई है। बयान में RSS की भूमिका पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया गया कि इस नरसंहार का “काला सच” सामने आना चाहिए। कहा गया कि यह जख्म आज भी ताजा हैं और पीड़ितों को न्याय नहीं मिल पाया है।
आरोपों में यह भी कहा गया कि उस समय RSS से जुड़े कुछ नेताओं पर FIR दर्ज हुई थी, जबकि नानाजी देशमुख जैसे विचारकों पर दंगों को जायज ठहराने की कोशिश करने का आरोप लगाया गया। बयान में प्रधानमंत्री पर भी निशाना साधते हुए उनके दावों को “झूठा” बताया गया।
इस मुद्दे पर बीजेपी और RSS से ऐतिहासिक जवाबदेही तय करने की मांग उठाई गई है, जिससे राजनीतिक माहौल एक बार फिर गर्मा गया है।
