मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने अप्रैल 2026 में भोपाल में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान पर गेहूं खरीदी में बड़े घोटाले और किसानों के साथ “खुली लूट” का गंभीर आरोप लगाया है।
जीतू पटवारी ने जो आरोप गेहूं खरीदी में घोटाले को सुनियोजित षड्यंत्र का दावा किया है पटवारी ने आरोप लगाया कि सरकार ने जान बूझकर गेहूं की सरकारी खरीदी (Procurement) में देरी की। उनका दावा है कि यह एक रणनीति थी ताकि किसान परेशान होकर अपनी फसल निजी मंडियों में ₹2000-2100 प्रति क्विंटल जैसे कम दामों पर बेचने को मजबूर हो जाएं, जबकि MSP और बोनस मिलाकर यह दर कहीं अधिक होनी चाहिए थी।
पैसों का “डाका”: उनके अनुसार, किसानों के हक का पैसा सत्ता के संरक्षण में कुछ “रसूखदारों” और बिचौलियों की जेब में पहुँचाया गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि इंदौर जैसे शहरों में प्रभावशाली लोगों का हजारों क्विंटल गेहूं बिना स्लॉट बुकिंग के खरीदा गया, जबकि आम किसान हफ्तों तक कतारों में रहे।
बारदानों की भारी कमी: आरोप है कि राज्य को लगभग 10 करोड़ बारदानों की जरूरत थी, लेकिन सरकार ने केवल 2.5 करोड़ की व्यवस्था की, जिससे खरीदी प्रक्रिया बाधित हुई।
सरकार की घेराबंदी और मांगें वादाखिलाफी का मुद्दा: पटवारी ने याद दिलाया कि भाजपा ने चुनाव के दौरान गेहूं के लिए ₹2700 प्रति क्विंटल का वादा किया था, लेकिन हकीकत में किसानों को बहुत कम मूल्य मिल रहा है।
प्रशासनिक लापरवाही: उन्होंने ई-उपार्जन पोर्टल और सैटेलाइट सर्वे में गड़बड़ियों का मुद्दा भी उठाया, जिसके कारण कई किसानों की फसल का सत्यापन नहीं हो पाया और वे खरीदी प्रक्रिया से बाहर हो गए।
आंदोलन की चेतावनी: पटवारी ने इन मुद्दों को लेकर पूरे प्रदेश में मंडियों के घेराव और कृषि मंत्री के निवास के सामने उपवास करने का ऐलान किया है।
