दिल्ली में प्रवर्तन निदेशालय (ED) की छापेमारी के दौरान उस वक्त हाई-वोल्टेज ड्रामा देखने को मिला, जब आम आदमी पार्टी से जुड़े एक नेता के करीबी के ठिकाने पर रेड पड़ते ही कथित तौर पर नोटों से भरे बैग और थैले खिड़की से बाहर सड़क पर फेंक दिए गए। देखते ही देखते सड़क पर नोटों की गड्डियां बिखर गईं और इलाके में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें लोग सड़क पर पड़े नोटों को देखकर हैरान नजर आ रहे हैं।
सूत्रों के मुताबिक, ED की टीम जैसे ही संबंधित ठिकाने पर पहुंची, अंदर मौजूद लोगों में घबराहट फैल गई। आरोप है कि जांच एजेंसियों से बचने के लिए बड़ी मात्रा में नकदी को खिड़की के रास्ते बाहर फेंक दिया गया। सड़क पर अचानक नोटों की बारिश जैसी स्थिति बन गई, जिसे देखकर आसपास के लोग भी मौके पर जमा हो गए। कुछ लोग वीडियो बनाते नजर आए तो कुछ कथित तौर पर नोट समेटने की कोशिश करते दिखाई दिए।
ED सूत्रों का दावा है कि बरामद की गई नकदी हवाला नेटवर्क, शराब घोटाले या अवैध फंडिंग से जुड़ी हो सकती है। हालांकि अभी तक एजेंसी की ओर से आधिकारिक रूप से रकम या मामले की पूरी जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है। जांच एजेंसियां नकदी के स्रोत, लेन-देन और उससे जुड़े लोगों की भूमिका की जांच कर रही हैं। बताया जा रहा है कि इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस, दस्तावेज और बैंक रिकॉर्ड भी खंगाले जा रहे हैं।
इस घटना के बाद राजनीतिक गलियारों में भी हलचल तेज हो गई है। विपक्षी दलों ने इसे भ्रष्टाचार का बड़ा उदाहरण बताते हुए आम आदमी पार्टी पर निशाना साधा है। सोशल media पर भी लोग सवाल उठा रहे हैं कि आखिर राजनीति में इतना कैश आता कहां से है? यदि पैसा वैध था तो उसे छिपाने या सड़क पर फेंकने की जरूरत क्यों पड़ी? लोगों का कहना है कि जब भी जांच एजेंसियां कार्रवाई करती हैं, तब करोड़ों रुपये नकद में मिलने की खबरें सामने आती हैं, जो राजनीतिक फंडिंग और काले धन की गंभीर समस्या की ओर इशारा करती हैं।
वहीं आम आदमी पार्टी की ओर से अभी तक इस पूरे मामले पर विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। पार्टी पहले भी ED और अन्य केंद्रीय एजेंसियों की कार्रवाई को राजनीतिक बदले की भावना से प्रेरित बताती रही है। लेकिन सड़क पर बिखरे नोटों की तस्वीरों और वीडियो ने विपक्ष को हमला करने का बड़ा मौका दे दिया है। विरोधी दल अब “कट्टर ईमानदार” की राजनीति पर सवाल खड़े कर रहे हैं और पारदर्शिता की मांग कर रहे हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि चुनाव से पहले इस तरह की कार्रवाई आम आदमी पार्टी के लिए नई मुश्किलें खड़ी कर सकती है। यदि जांच में बड़े आर्थिक घोटाले या हवाला नेटवर्क के सबूत सामने आते हैं, तो इसका असर राजनीतिक माहौल पर भी पड़ सकता है। फिलहाल ED की जांच जारी है, लेकिन सड़क पर बिखरी नोटों की गड्डियां देश की राजनीति और चुनावी फंडिंग को लेकर कई असहज सवाल छोड़ गई हैं।
न्यूज बाय: Sabiha Khan
