News by Azam lala
उस दोपहर में सब कुछ आम दिनों जैसा ही लग रहा था। लोग अपनी दुनिया में मशगूल थे, स्विमिंग पूल के आसपास हँसी-मज़ाक का माहौल था,
मगर किसी को अंदाज़ा नहीं था कि कुछ ही लम्हों में एक दोस्ती ख़ून से रंग दी जाएगी।
18 साल का सोहिल आलम अपने उसी दोस्त के साथ था, जिसके साथ उसने बचपन की गलियाँ देखी होंगी, जिसके साथ हँसा होगा, खेला होगा, जिसे शायद अपने भाई से भी ज़्यादा क़रीब समझता होगा। मगर इंसान चेहरों को पढ़ लेता है, नीयतों को नहीं… बताया जा रहा है कि दोनों के बीच पुरानी रंजिश थी। वक़्त गुज़रने के साथ शायद सोहिल ने सब कुछ भुला दिया था, उसे लगा होगा कि अब दिलों की दूरियाँ मिट चुकी हैं। लेकिन कुछ लोग मुस्कुराहट के पीछे नफ़रत छुपाकर रखते हैं।
स्विमिंग पूल में उतरते वक़्त सोहिल को क्या मालूम था कि जिसके साथ वो पानी में जा रहा है, वही उसे मौत की गहराइयों में धकेल देगा। धीरे-धीरे वो दोस्त उसे पानी में दबाने लगा। पहले शायद सोहिल को लगा होगा कि ये मज़ाक है… मगर जब साँसें टूटने लगीं, जब हाथ-पैर बेक़ाबू होकर फड़फड़ाने लगे, तब उसे एहसास हुआ होगा कि ये खेल नहीं, उसकी ज़िंदगी का आख़िरी लम्हा है।
“वो जिसे अपना हमराज़ समझ बैठा था, उसी ने उसकी साँसों का सौदा कर दिया… दोस्ती के लिबास में छुपे क़ातिल ने, भरोसे का भी क़त्ल कर दिया…” सबसे दर्दनाक बात ये रही कि आसपास लोग मौजूद थे, मगर किसी ने उस तड़पते हुए लड़के की बेचैनी को नहीं समझा। वो पानी में डूबता रहा, मौत से लड़ता रहा, और दुनिया उसे शायद मस्ती समझती रही।
जब CCTV तस्वीरें सामने आईं, तो सच ने हर किसी को ख़ामोश कर दिया। जिसे हादसा माना जा रहा था, वो दरअसल एक सोची-समझी साज़िश निकली।
“अब किस पर यक़ीन करें साहब,
यहाँ दोस्त भी मुखौटे पहनकर मिलते हैं…
जो हाथ थामने का दावा करते हैं,
वही मौक़ा देखकर डुबो देते हैं…”
सोहिल आलम की मौत सिर्फ़ एक नौजवान की मौत नहीं है, ये उस भरोसे की मौत है जो लोग अपने रिश्तों पर किया करते थे। आज का दौर ऐसा हो गया है जहाँ दुश्मन से कम, “अपनों” से ज़्यादा डर लगता है। अगर कोई पुरानी दुश्मनी भुलाकर अचानक बहुत करीब आने लगे, तो सिर्फ़ उसकी बातें मत सुनिए… उसकी नीयत को भी समझिए।
क्योंकि —
“हर मुस्कुराता चेहरा वफ़ादार नहीं होता,
कुछ लोग मोहब्बत का दिखावा सिर्फ़ वार करने के लिए करते हैं…”
