News by Azam lala
मध्य प्रदेश की सियासत में इन दिनों बयानबाज़ी का पारा चढ़ा हुआ है। मुख्यमंत्री मोहन यादव के “दो कोड़ी के नेता” वाले बयान पर अब कालापीपल विधानसभा के पूर्व विधायक कुणाल चौधरी का पलटवार सामने आया है। इस बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में बहस और आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज़ हो गया है। जगह जगह कांग्रेस कार्यकर्ता द्वारा मुख्यमंत्री का पुतला दहन की खबर भी आ रही है |
कुणाल चौधरी ने मुख्यमंत्री के बयान पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि पर्ची वाले मुख्यमंत्री को लोकतंत्र में जनता द्वारा चुने गए किसी भी जनप्रतिनिधि या राजनीतिक कार्यकर्ता के लिए इस तरह की भाषा का इस्तेमाल लोकतांत्रिक मूल्यों के अनुकूल नहीं माना जा सकता। उनके बयान के बाद कांग्रेस और भाजपा कार्यकर्ताओं के बीच भी चर्चा का माहौल गर्म हो गया है।
बयान से बढ़ी सियासी गर्माहट :
शाजापुर की राजनीतिक फिज़ा से उठी यह चिंगारी अब राजधानी भोपाल तक पहुंच गई है। दोनों दलों के नेता अपने-अपने पक्ष को सही साबित करने में जुटे हैं। सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक मंचों तक इस बयान को लेकर बहस छिड़ी हुई है।
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि आज के दौर में बयान सिर्फ़ शब्द नहीं होते, बल्कि उनके राजनीतिक मायने भी निकाले जाते हैं। कई बार एक टिप्पणी विपक्ष को नया मुद्दा दे देती है और सत्ता पक्ष को सफाई देने की स्थिति में ला खड़ा करती | मगर आज नेता मुद्दों की टिप्पणी से ज्यादा एक दूसरे पर अभद्र शब्दों के साथ कीचड़ उछालने से भी पीछे नहीं हट रहे |
मध्य प्रदेश की राजनीति में इन दिनों मुद्दों के साथ-साथ भाषा भी चर्चा का विषय बनती जा रही है। नेताओं के बीच तीखे हमले और व्यक्तिगत टिप्पणियां राजनीतिक तापमान को और बढ़ा रही हैं। हालांकि लोकतंत्र की खूबसूरती यही है कि हर बयान का जवाब बयान से दिया जाता है, न कि टकराव से।
फिलहाल “दो कोड़ी के नेता” वाले बयान और उस पर आए पलटवार ने इतना जरूर साबित कर दिया है कि प्रदेश की राजनीति में आने वाले दिनों में बयानबाज़ी का दौर और तेज़ हो सकता है। शाजापुर से शुरू हुई यह सियासी बहस अब भोपाल के सत्ता गलियारों तक गूंज रही है और हर कोई अगली प्रतिक्रिया का इंतज़ार कर रहा है।
