न्यूज़ बाय : प्रियंका सिंह
वृंदावन में पत्रकारों और स्थानीय प्रशासन के बीच तनाव की स्थिति उस समय पैदा हो गई जब एक महिला पर पत्रकारों को कथित रूप से जान से मारने की धमकी देने का आरोप लगा। इस मामले ने अब बड़ा रूप ले लिया है और पत्रकार समुदाय ने आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर वृंदावन कोतवाली के बाहर धरना शुरू कर दिया है।
पत्रकारों का आरोप है कि कथित भूमाफिया शिखा शर्मा ने कोतवाली परिसर में, और वह भी कोतवाल संजय पांडेय की मौजूदगी में, पत्रकारों को गंभीर परिणाम भुगतने तथा जान से मारने की धमकी दी। पत्रकारों का कहना है कि जब कानून-व्यवस्था की जिम्मेदारी संभालने वाले अधिकारियों के सामने ऐसी घटनाएं होती हैं और तत्काल कार्रवाई नहीं होती, तो इससे अपराधियों के हौसले बढ़ने का संदेश जाता है।
इसी आरोप के विरोध में वृंदावन के विभिन्न मीडिया संस्थानों से जुड़े पत्रकार एकजुट होकर कोतवाली के बाहर धरने पर बैठ गए। प्रदर्शनकारी पत्रकारों का कहना है कि यह मामला केवल कुछ पत्रकारों की सुरक्षा का नहीं, बल्कि प्रेस की स्वतंत्रता और पत्रकारों की सुरक्षा से भी जुड़ा हुआ है। उनका तर्क है कि यदि पत्रकार अपने कर्तव्यों का निर्वहन करते समय ही धमकियों का सामना करेंगे और उनकी शिकायतों पर कार्रवाई नहीं होगी, तो यह लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए चिंता का विषय है।
धरने पर बैठे पत्रकारों की मुख्य मांग है कि मामले में तत्काल एफआईआर दर्ज की जाए और आरोपित महिला के खिलाफ निष्पक्ष एवं सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए। उनका कहना है कि केवल आश्वासन नहीं, बल्कि ठोस कार्रवाई की जरूरत है ताकि भविष्य में किसी भी पत्रकार को इस तरह की धमकियों का सामना न करना पड़े।
वहीं, इस पूरे मामले ने स्थानीय स्तर पर कानून-व्यवस्था और प्रशासनिक जवाबदेही को लेकर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। पत्रकार संगठनों का कहना है कि यदि आरोप सही हैं, तो यह बेहद गंभीर विषय है और इसकी निष्पक्ष जांच कराई जानी चाहिए। दूसरी ओर, किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले संबंधित पक्षों के बयान और पुलिस जांच के निष्कर्ष भी महत्वपूर्ण होंगे।
फिलहाल कोतवाली के बाहर धरना जारी है और पत्रकार समुदाय अपनी मांगों पर अड़ा हुआ है। अब सभी की नजर प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी है। यदि जल्द समाधान नहीं निकलता, तो यह विरोध प्रदर्शन और व्यापक रूप ले सकता है।
यह मामला केवल एक शिकायत तक सीमित नहीं है, बल्कि पत्रकारों की सुरक्षा, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और कानून के निष्पक्ष क्रियान्वयन जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों से भी जुड़ा हुआ माना जा रहा है।
