न्यूज बाय- अमन नीलकंठ
चीन ने भविष्य की परिवहन तकनीक में एक और बड़ी छलांग लगाते हुए अपनी नई सुपरकंडक्टिंग मैगलेव ट्रेन का सफल परीक्षण किया है। दावा किया जा रहा है कि यह हाई-टेक ट्रेन महज 2 सेकंड में 0 से 700 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार पकड़ सकती है। इस उपलब्धि को दुनिया की सबसे तेज परिवहन तकनीकों में से एक माना जा रहा है, जो आने वाले समय में हवाई यात्रा को भी चुनौती दे सकती है।
जानकारी के अनुसार, यह परीक्षण चीन के शांसी प्रांत के दाटोंग शहर में बनाई गई सुपरकंडक्टिंग मैगलेव टेस्ट लाइन पर किया गया। परीक्षण के दौरान 1.1 टन वजनी प्रोटोटाइप ने रिकॉर्ड 700 किमी/घंटा की गति हासिल की। वैज्ञानिकों का कहना है कि भविष्य में इसी तकनीक के जरिए 1000 किमी/घंटा या उससे अधिक की स्पीड प्राप्त करना संभव हो सकता है।
मैगलेव यानी “मैग्नेटिक लेविटेशन” तकनीक पर आधारित यह ट्रेन सामान्य ट्रेनों से बिल्कुल अलग है। इसमें ट्रेन पटरी को छूती नहीं, बल्कि शक्तिशाली चुंबकीय बल की मदद से हवा में तैरते हुए आगे बढ़ती है। घर्षण लगभग खत्म हो जाने की वजह से ट्रेन बेहद तेज गति हासिल कर पाती है। यही तकनीक इसे पारंपरिक बुलेट ट्रेन से भी कहीं अधिक उन्नत बनाती है।
विशेषज्ञों के मुताबिक, यदि यह तकनीक पूरी तरह सफल होती है तो 1,000 से 1,500 किलोमीटर तक की दूरी तय करने में यह हवाई जहाज का बेहतर विकल्प बन सकती है। उदाहरण के तौर पर बीजिंग से शंघाई तक का सफर, जो अभी कई घंटों में पूरा होता है, भविष्य में सिर्फ 90 मिनट में तय किया जा सकेगा। इससे यात्रा का समय कम होगा, एयर ट्रैफिक पर दबाव घटेगा और परिवहन व्यवस्था में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।
चीन लंबे समय से हाई-स्पीड रेल तकनीक में भारी निवेश कर रहा है और अब वह सुपरकंडक्टिंग मैगलेव सिस्टम के जरिए दुनिया में तकनीकी नेतृत्व हासिल करने की कोशिश में है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस तकनीक को 2027 से 2035 के बीच व्यावसायिक रूप से शुरू किए जाने की संभावना है।
हालांकि विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि इतनी तेज गति वाली ट्रेनों के लिए अत्याधुनिक ट्रैक, सुरक्षा प्रणाली और भारी निवेश की जरूरत होगी। इसके बावजूद यह परीक्षण इस बात का संकेत है कि भविष्य में यात्रा का तरीका पूरी तरह बदल सकता है, जहां शहरों के बीच हजार किलोमीटर की दूरी भी कुछ घंटों में सिमट जाएगी।
