पटवारी बोले-भाजपा की अकल ठिकाने लगा देंगे कांग्रेस ने दिखाई एकजुटता, जीतू पटवारी बोले— मीनाक्षी को जिताकर भाजपा की अकल ठिकाने लगा देंगे; तीसरे उम्मीदवार के मैदान में उतरने से मुकाबला हुआ रोमांचक |
भोपाल मप्र | मध्य प्रदेश की तीन राज्यसभा सीटों के लिए होने वाले चुनाव ने प्रदेश की राजनीति का तापमान बढ़ा दिया है। कांग्रेस प्रत्याशी मीनाक्षी नटराजन ने सोमवार को विधानसभा पहुंचकर अपना नामांकन दाखिल किया। इस दौरान कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेता और विधायक मौजूद रहे, जिन्होंने पार्टी की एकजुटता का प्रदर्शन किया।
नामांकन दाखिल करने के बाद मीनाक्षी नटराजन ने दावा किया कि कांग्रेस पूरी तरह एकजुट है और पार्टी के सभी विधायक उनके साथ खड़े हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि कांग्रेस यह चुनाव जीतने में सफल होगी।

PCC चीफ जीतू पटवारी का भाजपा पर तीखा हमला
वहीं प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने भाजपा पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि कांग्रेस मीनाक्षी नटराजन को जिताकर भाजपा की “अकल ठिकाने” लगा देगी।
बीजेपी ने बढ़ाया सस्पेंस
दूसरी ओर भाजपा द्वारा ऐन वक्त पर महेश केवट को तीसरे उम्मीदवार के रूप में मैदान में उतारने से चुनावी मुकाबला बेहद दिलचस्प हो गया है। कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने दावा किया कि प्रदेश के विकास की सोच रखने वाले विधायक भाजपा उम्मीदवार का समर्थन करेंगे। उन्होंने कहा कि यदि पार्टी नेतृत्व का निर्देश होगा तो भाजपा तीसरी सीट जीतने के लिए भी पूरी ताकत लगाएगी।

फिर शुरू हुई रिसॉर्ट पॉलिटिक्स की चर्चा
राज्यसभा चुनाव के बीच एक बार फिर रिसॉर्ट पॉलिटिक्स की चर्चाएं तेज हो गई हैं। सूत्रों के अनुसार कांग्रेस अपने विधायकों को तेलंगाना या कर्नाटक शिफ्ट कर सकती है ताकि किसी तरह की टूट-फूट की आशंका से बचा जा सके। सूत्र बताते हैं कि इस पूरी रणनीति की जिम्मेदारी कुणाल चौधरी और विधायक आरिफ मसूद को सौंपी गई है। इसी बीच दोनों नेताओं का एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसमें वे विमान में बैठकर चर्चा करते नजर आ रहे हैं। हालांकि वीडियो को लेकर कांग्रेस की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

नजरें अब मतदान पर
मध्य प्रदेश का राज्यसभा चुनाव अब पूरी तरह प्रतिष्ठा की लड़ाई बन चुका है। कांग्रेस अपनी उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन की जीत का दावा कर रही है, जबकि भाजपा तीसरी सीट जीतने के लिए आक्रामक रणनीति पर काम कर रही है। अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि कांग्रेस अपनी उम्मीदवार को जीत दिलाने में सफल होती है या भाजपा अपने तीसरे उम्मीदवार के जरिए सियासी समीकरण बदलने में कामयाब होती है।

