रिपोर्ट – गोपाल देवकर
बुरहानपुर। जिले में हाल ही में आए आंधी, तूफान और बेमौसम बारिश से केला फसल को हुए भारी नुकसान के बाद किसानों की चिंता लगातार बढ़ती जा रही है। इसी बीच खंडवा-बुरहानपुर सांसद ज्ञानेश्वर पाटील ने मुख्यमंत्री मोहन यादव से मुलाकात के अगले ही दिन प्रभावित क्षेत्रों का दौरा किया और किसानों को राहत का भरोसा दिलाया।
दौरे के दौरान नेपानगर विधायक मंजू दादू, जिला पंचायत अध्यक्ष गंगाराम मार्को सहित प्रशासनिक अधिकारी भी मौजूद रहे। जनप्रतिनिधियों ने तुकईथड़ सहित आसपास के कई गांवों में पहुंचकर खेतों में खड़ी और गिरी हुई केला फसलों का निरीक्षण किया तथा नुकसान की वास्तविक स्थिति का आकलन किया।

खेतों में पहुंचकर किसानों से सीधा संवाद :
निरीक्षण के दौरान सांसद और अन्य जनप्रतिनिधियों ने किसानों से सीधे बातचीत कर उनकी समस्याएं सुनीं। किसानों ने बताया कि तेज आंधी और बारिश के कारण हजारों एकड़ में लगी केला फसल को भारी नुकसान हुआ है, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति पर गंभीर असर पड़ा है।
सांसद ज्ञानेश्वर पाटील ने किसानों को बताया कि उन्होंने हाल ही में भोपाल में मुख्यमंत्री से मुलाकात कर जिले की स्थिति से अवगत कराया है। उन्होंने कहा कि सरकार इस संकट की घड़ी में पूरी तरह किसानों के साथ खड़ी है।
किसान चौपाल में अधिकारियों को निर्देश :
दरियापुर रैयत में आयोजित किसान चौपाल के दौरान जनप्रतिनिधियों ने किसानों से विस्तृत संवाद किया और उन्हें आश्वस्त किया कि सर्वे कार्य पूरी पारदर्शिता और निष्पक्षता के साथ किया जाएगा। अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि किसी भी प्रभावित किसान का नुकसान अनदेखा न रहे और वास्तविक स्थिति के आधार पर ही रिपोर्ट तैयार की जाए।
सांसद ने कहा कि सर्वे पूरा होते ही प्रभावित किसानों को जल्द से जल्द राहत राशि और मुआवजा उपलब्ध कराने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।

मुख्यमंत्री से मिला आश्वासन :
सांसद ने यह भी बताया कि मुख्यमंत्री ने किसानों के लिए वीडियो संदेश जारी कर आश्वासन दिया है कि राज्य सरकार हर प्रभावित किसान के साथ है और किसी को भी अकेला नहीं छोड़ा जाएगा।
किसानों को न्याय का भरोसा :
इस दौरान सांसद ज्ञानेश्वर पाटील ने कहा कि भाजपा सरकार किसानों की समस्याओं को लेकर संवेदनशील है और नुकसान का आकलन कर हर संभव सहायता सुनिश्चित की जाएगी।
किसानों के बीच पहुंचे जनप्रतिनिधियों के इस दौरे को राहत की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। अब सभी की नजरें प्रशासनिक सर्वे और मुआवजा प्रक्रिया पर टिकी हैं, जिससे यह तय होगा कि प्रभावित किसानों को वास्तविक राहत कब तक मिल पाती है।

