NEWS BY : AAZAM LALA
“अक्सर सबसे गहरा ज़ख्म वही देता है,
जिस पर इंसान को सबसे ज़्यादा भरोसा होता है…”
कोहेफिजा के पॉश इलाके सूरज नगर की वो सनसनीखेज वारदात आज भी शहर के ज़ेहन में ताज़ा है…
मशहूर एडवोकेट अखिलेश श्रीवास्तव के घर हुई 18 लाख की चोरी ने सिर्फ ताले नहीं तोड़े थे, बल्कि बरसों पुराने एतबार को भी चकनाचूर कर दिया था।
जिस नौकरानी ज्योति सावले पर घरवालों ने करीब 20 साल तक आंख बंद कर भरोसा किया…
उसी ने लालच की चमक में वफादारी का जनाज़ा निकाल दिया।
घर के कोने-कोने से वाकिफ उस औरत ने चंद जेवरात और नकदी की खातिर उस भरोसे को यूं कुर्बान किया,
जैसे हड्डी देखकर कुत्ता अपने मालिक की वफादारी भूल जाए।
वारदात के बाद चोरी की पूरी स्क्रिप्ट इतनी सफाई से रची गई थी कि हर शक बाहरी चोरों की तरफ जाता दिखाई दे रहा था।
ऐसा लग रहा था जैसे कोई अनजान गैंग आया… ताले तोड़े… माल समेटा और रात के अंधेरे में गायब हो गया।
मगर कहते हैं ना…
“मुजरिम कितना भी शातिर क्यों ना हो,
सबूत कभी झूठ नहीं बोलते…”
कोहेफिजा पुलिस थाना प्रभारी ओर वरिष्ठ अधिकारियों की अगुवाई में इस केस की तह तक पहुंचने के लिए हर छोटे से छोटे एविडेंस का बारीकी से निरीक्षण किया।
पुलिस ने उस दास्तान को ऐसे पढ़ा जैसे कोई माहिर डॉक्टर नब्ज देखकर बीमारी पहचान लेता है।
और फिर शक की सुई जाकर रुकी उसी नौकरानी पर…
जो इस पूरे खेल की मास्टरमाइंड निकली।
लेकिन लालच की बुनियाद पर लिखी गई इस चोरी की कहानी में सिर्फ एक चेहरा नहीं था…
धीरे-धीरे एक पूरा काफिला सामने आने लगा।
एक के बाद एक आरोपी बेनकाब होते गए और 7 आरोपी सलाखों के पीछे पहुंचा दिए गए।
फिर भी कुछ चेहरे अब तक कानून की पकड़ से दूर थे।
आज इस हाई-प्रोफाइल डकैती कांड में कोहेफिजा पुलिस को एक और बड़ी कामयाबी मिली…
फरार चल रहा शातिर बदमाश इरफान उर्फ पल्सर आखिरकार पुलिस की गिरफ्त में आ गया।
पुलिस और इरफान पल्सर के बीच चल रहा आंख-मिचौली का खेल अब खत्म हो चुका है।
माना जा रहा है कि इरफान की गिरफ्तारी के बाद इस वारदात से जुड़े कई और राज़ बेनकाब हो सकते हैं।
फरार आरोपियों की जानकारी से लेकर लूटे गए जेवरात और नकदी की बरामदगी तक, पुलिस को कई अहम सुराग मिलने की उम्मीद है।
कोहेफिजा के नव पदस्थ पुलिस थाना प्रभारी गोपाल शुक्ला और उनकी टीम की लगातार मेहनत अब रंग लाती दिखाई दे रही है।
“गुनाह की राह चाहे कितनी भी लंबी क्यों ना हो,
उसका आख़िरी मोड़ अक्सर जेल की सलाखों पर ही खत्म होता है…”
