ओडिशा की राजधानी भुवनेश्वर के बालियंता इलाके में हुई GRP कांस्टेबल की मॉब लिंचिंग ने पूरे राज्य को झकझोर दिया है। 7 मई 2026 को हुई इस घटना में GRP कांस्टेबल सौम्य रंजन स्वैन की कथित तौर पर गुस्साई भीड़ ने पीट-पीटकर हत्या कर दी। इस घटना के बाद राज्य की कानून-व्यवस्था, पुलिस की भूमिका और बढ़ते भीड़तंत्र को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। मामला अब राजनीतिक रूप भी ले चुका है, जहां विपक्षी दल सरकार पर लगातार हमला बोल रहे हैं।
घटना को लेकर दो अलग-अलग दावे सामने आ रहे हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि कांस्टेबल सौम्य रंजन स्वैन और उनके एक साथी ने स्कूटर सवार दो महिलाओं को टक्कर मारी थी। आरोप यह भी लगाया गया कि विवाद के दौरान महिलाओं के साथ छेड़छाड़ की गई, जिससे वहां मौजूद लोग भड़क गए। देखते ही देखते भीड़ ने दोनों को घेर लिया और कथित तौर पर कांस्टेबल को बांधकर बेरहमी से पीटना शुरू कर दिया। इस हिंसा में गंभीर रूप से घायल हुए सौम्य रंजन की बाद में मौत हो गई।
वहीं दूसरी ओर मृतक कांस्टेबल के परिवार ने पूरी घटना को भीड़तंत्र की भयावह मिसाल बताते हुए पुलिस प्रशासन पर गंभीर लापरवाही के आरोप लगाए हैं। परिवार का कहना है कि घटना के दौरान पुलिस मौके पर मौजूद थी, लेकिन समय रहते सौम्य रंजन को बचाने के लिए प्रभावी कदम नहीं उठाए गए। उनका आरोप है कि एक वर्दीधारी जवान को सरेआम पीट-पीटकर मार दिया गया और पुलिस तमाशबीन बनी रही। इस घटना ने पुलिस बल के भीतर भी नाराजगी और चिंता बढ़ा दी है।
घटना के बाद राज्य की राजनीति भी गरमा गई है। कांग्रेस ने इसे “तालिबानी राज” करार देते हुए राज्य सरकार पर कानून-व्यवस्था पूरी तरह विफल होने का आरोप लगाया है। वहीं बीजू जनता दल यानी BJD ने भी राज्य में “जंगलराज” जैसी स्थिति बनने की बात कही है। विपक्ष का कहना है कि यदि पुलिसकर्मी ही सुरक्षित नहीं हैं, तो आम जनता की सुरक्षा का अंदाजा लगाया जा सकता है। दूसरी ओर पुलिस ने मामले में कार्रवाई करते हुए अब तक 5 आरोपियों को गिरफ्तार किया है और अन्य संदिग्धों की तलाश जारी है।
राज्य सरकार की ओर से मामले को गंभीरता से लेते हुए सख्त जांच के आदेश दिए गए हैं। मुख्यमंत्री कार्यालय ने स्पष्ट किया है कि दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी। हालांकि यह घटना एक बार फिर इस सवाल को सामने लाती है कि क्या देश में भीड़ का न्याय कानून से ऊपर होता जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी आरोप या विवाद का फैसला कानून और न्यायपालिका के जरिए होना चाहिए, न कि हिंसक भीड़ के जरिए। साथ ही यह मामला पुलिस की त्वरित कार्रवाई और भीड़ नियंत्रण व्यवस्था पर भी गंभीर चिंतन की मांग करता है।
न्यूज़ बाय : साबिहा खान
