मध्य प्रदेश की मोहन यादव सरकार एक बार फिर बाजार से 2800 करोड़ रुपये का कर्ज लेने जा रही है। यह राशि भारतीय रिजर्व बैंक के माध्यम से सरकारी बॉन्ड जारी कर जुटाई जाएगी। इस नई उधारी के साथ ही चालू वित्त वर्ष 2026-27 में राज्य सरकार द्वारा लिए गए कुल कर्ज का आंकड़ा 12 हजार करोड़ रुपये के पार पहुंच जाएगा।

जानकारी के अनुसार, सरकार यह कर्ज दो अलग-अलग बॉन्ड के जरिए जुटाएगी। राज्य सरकार का कहना है कि यह राशि विकास कार्यों, बुनियादी ढांचे की परियोजनाओं और अन्य वित्तीय जरूरतों को पूरा करने के लिए उपयोग की जाएगी। कर्ज लेने की प्रक्रिया RBI की निगरानी में पूरी की जाएगी।

वित्तीय जानकारों के अनुसार, मध्य प्रदेश लगातार बाजार से उधारी लेकर अपनी विकास योजनाओं और विभिन्न कल्याणकारी कार्यक्रमों के लिए संसाधन जुटा रहा है। हालांकि, लगातार बढ़ते कर्ज को लेकर विपक्ष सरकार पर सवाल भी उठा रहा है। वहीं सरकार का तर्क है कि राज्यों के लिए विकास परियोजनाओं के वित्तपोषण हेतु बाजार से कर्ज लेना एक सामान्य प्रक्रिया है।
इससे पहले भी राज्य सरकार कई बार बॉन्ड के जरिए हजारों करोड़ रुपये का कर्ज ले चुकी है। पिछले वर्ष भी मध्य प्रदेश ने 4800 करोड़ रुपये का कर्ज सरकारी बॉन्ड के माध्यम से जुटाया था।

अब जानना यह है कि सरकार इस नई कर्ज का उपयोग किन प्रमुख परियोजनाओं और योजनाओं में करती है तथा बढ़ते कर्ज के बोझ को किस तरह संतुलित करती है।
