News by : Aazam lala
कुणाल चौधरी ने एक बार फिर प्रदेश की भारतीय जनता पार्टी सरकार को किसानों और MSP यानी न्यूनतम समर्थन मूल्य के मुद्दे पर घेरते हुए तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार लगातार खुद को “किसान हितैषी” बताती है, लेकिन ज़मीनी हकीकत इससे बिल्कुल अलग है। उनके मुताबिक किसानों को आज भी अपनी उपज का सही दाम पाने के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है और सरकार सिर्फ घोषणाओं और प्रचार तक सीमित होकर रह गई है।
कुणाल चौधरी ने खासतौर पर गेहूं खरीद और बोनस के मुद्दे को उठाते हुए कहा कि बीजेपी ने चुनावों और जनसभाओं में किसानों से बड़े-बड़े वादे किए थे। किसानों को उम्मीद दिलाई गई थी कि MSP में ऐतिहासिक बढ़ोतरी होगी और बोनस के जरिए उनकी आय बढ़ाई जाएगी, लेकिन बाद में सरकार ने बेहद मामूली बढ़ोतरी कर उसे बड़ी उपलब्धि के तौर पर पेश करना शुरू कर दिया। उनका कहना है कि खेती की लागत लगातार बढ़ रही है—डीजल, खाद, बीज और बिजली सब महंगे हो चुके हैं—लेकिन किसानों की आमदनी उसी अनुपात में नहीं बढ़ पाई।
कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि सरकार सिर्फ आंकड़ों और विज्ञापनों के जरिए किसानों को भ्रमित करने की कोशिश कर रही है। उन्होंने कहा कि यदि सरकार वास्तव में किसान हितैषी होती, तो किसानों को अपनी फसल बेचने के लिए लंबी लाइनों में खड़ा नहीं होना पड़ता और भुगतान में देरी जैसी समस्याएं सामने नहीं आतीं। उन्होंने यह भी दावा किया कि कई किसान अभी भी समर्थन मूल्य और बोनस की पूरी राशि मिलने का इंतजार कर रहे हैं।
कुणाल चौधरी ने कहा कि मध्य प्रदेश लंबे समय से कृषि प्रधान राज्य माना जाता है और यहां के किसान प्रदेश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं। ऐसे में किसानों को सिर्फ राजनीतिक नारों का हिस्सा बनाना ठीक नहीं है। उन्होंने मांग की कि सरकार MSP को कानूनी गारंटी देने, किसानों की लागत के अनुसार मूल्य तय करने और बोनस भुगतान की प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी बनाने की दिशा में ठोस कदम उठाए।
इस बयान के बाद प्रदेश में MSP और किसान नीति को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। एक ओर कांग्रेस सरकार की नीतियों को किसान विरोधी बता रही है, वहीं बीजेपी लगातार यह दावा कर रही है कि उसकी योजनाओं से किसानों को रिकॉर्ड लाभ मिला है। आने वाले समय में यह मुद्दा प्रदेश की राजनीति में और अधिक गर्माने की संभावना है।
