न्यूज बाय : अनुराधा दुबे
भारतीय शेयर बाजार में शुक्रवार को पूरे दिन जबरदस्त उतार-चढ़ाव देखने को मिला। सुबह 9:15 बजे बाजार खुलते ही सेंसेक्स और निफ्टी ने मजबूती के साथ कारोबार की शुरुआत की थी, लेकिन जैसे-जैसे दिन आगे बढ़ा, बाजार पर बिकवाली का दबाव हावी होता गया। दोपहर के सत्र में निवेशकों की सतर्कता और मुनाफावसूली के चलते बाजार की शुरुआती बढ़त पूरी तरह गायब हो गई और अंततः दोनों प्रमुख सूचकांक लाल निशान पर बंद हुए।
कारोबार के दौरान आईटी और ऑटो सेक्टर के शेयरों में कमजोरी का असर बाजार पर सबसे अधिक दिखाई दिया। कई बड़ी आईटी कंपनियों के शेयरों में गिरावट दर्ज की गई, जिससे निवेशकों का भरोसा कमजोर पड़ा। वहीं ऑटो सेक्टर में भी सुस्ती देखने को मिली, जिसके चलते बाजार का माहौल दबाव में रहा। बैंकिंग और वित्तीय शेयरों में भी सीमित दायरे में कारोबार होता दिखाई दिया।
विशेषज्ञों के मुताबिक वैश्विक बाजारों से मिले मिले-जुले संकेत, विदेशी निवेशकों की गतिविधियां और मुनाफावसूली की रणनीति बाजार में अस्थिरता की बड़ी वजह रही। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आर्थिक अनिश्चितताओं और ब्याज दरों को लेकर बनी चिंताओं का असर भी भारतीय बाजार पर देखने को मिला। निवेशक फिलहाल किसी बड़े निवेश से पहले वैश्विक संकेतों और आगामी आर्थिक आंकड़ों पर नजर बनाए हुए हैं।
मार्केट एक्सपर्ट्स का कहना है कि हाल के दिनों में बाजार में लगातार तेजी देखने को मिली थी, ऐसे में निवेशकों द्वारा मुनाफावसूली करना स्वाभाविक माना जा रहा है। हालांकि दीर्घकालिक दृष्टि से भारतीय अर्थव्यवस्था की स्थिति मजबूत बनी हुई है, लेकिन अल्पकाल में बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है।
विशेषज्ञों ने निवेशकों को सलाह दी है कि वे बाजार की अस्थिरता के बीच जल्दबाजी में फैसले लेने से बचें और सोच-समझकर निवेश करें। आने वाले दिनों में वैश्विक बाजारों की चाल, कच्चे तेल की कीमतें और विदेशी निवेशकों का रुख भारतीय शेयर बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकता है।
