अयोध्या के राम मंदिर में श्रद्धालुओं के चढ़ावे और दान राशि में कथित अनियमितताओं के मामले ने अब बड़ा रूप ले लिया है। इस पूरे मामले की जांच कर रही विशेष जांच टीम SIT ने अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट उत्तर प्रदेश सरकार को सौंप दी है। रिपोर्ट के बाद जांच का दायरा और बढ़ गया है तथा कई नए पहलुओं की पड़ताल की जा रही है।
मामले की शुरुआत दान पेटियों और चढ़ावे के प्रबंधन में कथित गड़बड़ियों के आरोपों से हुई थी। विपक्षी दलों ने आरोप लगाया था कि करोड़ों रुपये के चढ़ावे के प्रबंधन में गंभीर अनियमितताएं हुई हैं। इसी के बाद राज्य सरकार ने SIT का गठन कर जांच के आदेश दिए थे।
अब जांच केवल नकदी और चढ़ावे तक सीमित नहीं है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार SIT VIP दर्शन व्यवस्था से जुड़े पहलुओं की भी जांच कर रही है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि कहीं विशेष दर्शन की व्यवस्था के नाम पर कोई समानांतर तंत्र तो नहीं बनाया गया था और उससे जुड़े आर्थिक लेन-देन में कोई गड़बड़ी तो नहीं हुई।

मुख्यमंत्री Yogi Adityanath ने भी मामले को गंभीर बताते हुए कहा है कि जांच निष्पक्ष तरीके से आगे बढ़ रही है और सच्चाई जल्द सामने आएगी। उन्होंने लोगों से जांच पूरी होने तक धैर्य रखने और बिना तथ्यों के निष्कर्ष निकालने से बचने की अपील की है।
वहीं विपक्ष लगातार न्यायिक जांच की मांग उठा रहा है। कांग्रेस ने हाईकोर्ट के मौजूदा न्यायाधीश की निगरानी में समयबद्ध जांच की मांग की है, जबकि समाजवादी पार्टी ने इस पूरे प्रकरण को श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ा गंभीर मामला बताया है।
राम मंदिर देशभर के करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। ऐसे में चढ़ावे और दान राशि से जुड़े किसी भी विवाद पर लोगों की नजर बनी हुई है। अब सभी की निगाहें SIT की अंतिम रिपोर्ट पर टिकी हैं, जिससे यह साफ हो सकेगा कि आरोपों में कितनी सच्चाई है और यदि कोई अनियमितता हुई है तो उसके लिए जिम्मेदार कौन है।
