NEWS BY : AAZAM LALA
आज के दौर में इंसानी जज़्बात भी कुछ लोगों के लिए सिर्फ़ कारोबार बन चुके हैं। रिश्तों की पाकीज़गी, शादी की अज़मत और भरोसे की कीमत को जिस तरह कुछ शातिर लोग अपने मफ़ाद के लिए इस्तेमाल कर रहे हैं, वह समाज के लिए बेहद तश्वीशनाक है।
भोपाल देहात के नजीराबाद थाना क्षेत्र में सामने आया यह मामला सिर्फ़ ढाई लाख रुपये की ठगी नहीं, बल्कि एक मासूम ख़ानदान के अरमानों, उम्मीदों और एहसासात की बेरहमी से की गई सौदागरी है। एक ऐसे नौजवान की ज़िंदगी से खेला गया जिसकी ख़्वाहिश सिर्फ़ अपना घर बसाने की थी।
आरोपियों ने पहले रिश्तेदारी और भरोसे का जाल बुना, फिर एक महिला को दुल्हन बनाकर पेश किया। मंदिर में शादी करवाई गई, रस्में निभाई गईं, सपने सजाए गए और ढाई लाख रुपये ऐंठ लिए गए। दस दिनों तक वह महिला पत्नी बनकर घर में रही, ताकि किसी को शक न हो। लेकिन एक रात वह ख़ामोशी से ग़ायब हो गई और साथ ले गई एक परिवार का सुकून, उनका एतमाद और उनकी उम्मीदें।
यह वारदात हमें यह सोचने पर मजबूर करती है कि जब रिश्ता भी मुनाफ़े का ज़रिया बन जाए, तो इंसानियत किस मुकाम पर खड़ी है? शादी जैसी मुक़द्दस रस्म को ठगी का औज़ार बना देना सिर्फ़ क़ानूनन जुर्म नहीं, बल्कि अख़लाक़ी पतन की इंतिहा है।
क़ाबिले-तारीफ़ है नजीराबाद पुलिस की मुस्तैदी, जिसने शिकायत मिलते ही त्वरित कार्रवाई कर इस गिरोह का पर्दाफाश किया। महिला सहित तीन आरोपियों की गिरफ़्तारी इस बात का सबूत है कि अगर शिकायतकर्ता हिम्मत करे और पुलिस संजीदगी से काम करे, तो धोखेबाज़ कितने भी चालाक हों, कानून के शिकंजे से बच नहीं सकते।
यह घटना समाज के लिए एक सख़्त पैग़ाम है कि शादी-ब्याह जैसे मामलों में जल्दबाज़ी और अंधविश्वास से बचना चाहिए। रिश्तों की तहक़ीक़ात, पहचान की तस्दीक़ और सामाजिक सतर्कता आज के दौर की अहम ज़रूरत बन चुकी है।
क्योंकि हर मुस्कुराता चेहरा हमदर्द नहीं होता, और हर रिश्ता वफ़ा की ज़मानत नहीं देता |
