नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी छह दिवसीय विदेश दौरे पर फ्रांस और स्लोवाकिया के लिए रवाना हो गए हैं। इस यात्रा के दौरान वह फ्रांस में आयोजित होने वाले G7 शिखर सम्मेलन में भाग लेंगे और कई वैश्विक नेताओं के साथ द्विपक्षीय बैठकें करेंगे। भारत साझेदार देश के रूप में लगातार 13वीं बार G7 बैठक में शामिल हो रहा है, जिससे वैश्विक मंच पर उसकी बढ़ती भूमिका का भी संकेत मिलता है।
G7 सम्मेलन में वैश्विक चुनौतियों पर होगी चर्चा
15 जून से शुरू होने वाले G7 शिखर सम्मेलन में वैश्विक अर्थव्यवस्था, ऊर्जा सुरक्षा, जलवायु परिवर्तन, खाद्य सुरक्षा, डिजिटल तकनीक और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा जैसे मुद्दों पर चर्चा होगी। प्रधानमंत्री मोदी सम्मेलन में भारत का पक्ष रखते हुए विकासशील देशों से जुड़े मुद्दों को भी प्रमुखता से उठाएंगे। इसके अलावा दुनिया के प्रमुख नेताओं के साथ होने वाली बैठकों में व्यापार और निवेश को बढ़ावा देने पर भी बातचीत की संभावना है।
फ्रांस के साथ रक्षा सहयोग पर रहेगी विशेष नजर
दौरे का एक अहम पहलू भारत और फ्रांस के बीच रणनीतिक और रक्षा सहयोग भी रहेगा। माना जा रहा है कि राफेल लड़ाकू विमान सौदे और रक्षा क्षेत्र में भविष्य के सहयोग को लेकर दोनों देशों के बीच महत्वपूर्ण चर्चा हो सकती है। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह यात्रा दोनों देशों के बीच सुरक्षा साझेदारी को और मजबूत करने का अवसर बनेगी।
स्लोवाकिया दौरा भी रहेगा खास
फ्रांस के बाद प्रधानमंत्री मोदी स्लोवाकिया का दौरा करेंगे, जहां द्विपक्षीय संबंधों को नई दिशा देने पर जोर रहेगा। व्यापार, तकनीक, नवाचार और औद्योगिक सहयोग जैसे क्षेत्रों में नए अवसरों पर चर्चा होने की उम्मीद है। यह दौरा यूरोप के साथ भारत के बढ़ते संबंधों को और मजबूती देने वाला माना जा रहा है।
वैश्विक मंच पर भारत की बढ़ती भूमिका
विशेषज्ञों के अनुसार प्रधानमंत्री मोदी की यह यात्रा केवल कूटनीतिक औपचारिकता नहीं बल्कि भारत की वैश्विक भूमिका को और मजबूत करने का अवसर है। G7 जैसे मंच पर भारत की सक्रिय भागीदारी और प्रमुख देशों के साथ बढ़ते सहयोग से वैश्विक राजनीति, अर्थव्यवस्था और सुरक्षा मामलों में भारत की स्थिति लगातार मजबूत हो रही है।
