अपनी लंबित मांगों और सरकार की वादाखिलाफी से नाराज प्रदेश भर के हजारों अतिथि शिक्षक आज राजधानी भोपाल के आंबेडकर मैदान में लामबंद हुए। ‘स्कूल अतिथि शिक्षक संयुक्त मोर्चा’ के नेतृत्व में आयोजित इस विरोध प्रदर्शन ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। शिक्षकों का कहना है कि सरकार ने पूर्व में जो वादे किए थे, वे आज तक कागजों से बाहर नहीं निकले हैं, जिससे हजारों परिवारों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है।
“आश्वासनों का घड़ा भर चुका है”
प्रदर्शनकारियों को संबोधित करते हुए संगठन के पदाधिकारियों ने कहा कि अतिथि शिक्षक वर्षों से बेहद कम मानदेय पर अपनी सेवाएं दे रहे हैं, लेकिन उन्हें वह सम्मान और सुरक्षा नहीं मिली जिसके वे हकदार हैं। सरकार ने चुनावी समय में कई लुभावने वादे किए थे, जिन्हें अब तक ठंडे बस्ते में डाल दिया गया है। इसी ‘वादाखिलाफी’ के विरोध में आज पूरे प्रदेश से शिक्षक अपनी आवाज बुलंद करने भोपाल पहुंचे हैं। अतिथि शिक्षकों ने स्पष्ट किया है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, उनका संघर्ष जारी रहेगा।
अतिथि शिक्षकों को 62 वर्ष की आयु तक पद पर बने रहने की अनुमति दी जाए ताकि उनका भविष्य सुरक्षित हो सके। वर्तमान में अतिथि शिक्षकों की सेवाएं सत्र के आधार पर ली जाती हैं, जिसे बढ़ाकर पूरे 12 महीने का करने की मांग की गई है। पुराने और अनुभवी अतिथि शिक्षकों को प्राथमिकता देते हुए विभागीय स्तर पर सुरक्षित नीति बनाई जाए।
जाहिद खान की रिपोर्ट
