रामेश्वर शर्मा बोले – ‘छाती ठोककर विरोध करो, मेट्रो फिर भी निकलेगी’, आरिफ मसूद का पलटवार – ‘बिना परमिशन खुदाई, एक काम पूरा नहीं दूसरा शुरू |
BJP विधायक रामेश्वर शर्मा का बयान सीधा है – “विकास रुकेगा नहीं। छाती ठोककर विरोध कर लो, मेट्रो कब्रिस्तान के नीचे से ही जाएगी।” उनका इशारा साफ है कि जनहित के प्रोजेक्ट को भावनाओं के नाम पर लटकाया नहीं जा सकता। दूसरी तरफ कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद का आरोप है कि “सरकार की आदत है बिना परमिशन खोद देना। सड़क बनती नहीं, सीवर अधूरा, और मेट्रो की खुदाई शुरू। वक्फ की जमीन हो या आम जनता की, पहले काम शुरू करते हैं, NOC बाद में ढूंढते हैं।” दोनों बयान बता रहे हैं कि मुद्दा टनल की गहराई नहीं, सियासी इगो का है।
असल पेंच क्या है –
ये लड़ाई ‘विकास vs आस्था’ से ज्यादा ‘भरोसा vs जल्दबाजी’ की है। रामेश्वर शर्मा का ‘निकलेगी ही’ वाला एटीट्यूड प्रशासनिक अहंकार लगता है, तो आरिफ मसूद का ‘बिना परमिशन’ वाला आरोप पिछले अनुभवों से निकला है – भोपाल में स्मार्ट सिटी के गड्ढे इसका सबूत हैं। हल बीच में है: मेट्रो जरूरी है, पर वक्फ NOC, मुतवल्ली की सहमति और टनल मैप पब्लिक करना भी उतना ही जरूरी। वरना छाती ठोकने से मेट्रो निकलेगी, पर साथ में अविश्वास की दरार भी चौड़ी होगी। और एक बार भरोसा टूटा, तो कल हर पिलर पर विरोध का बोर्ड लगेगा।
न्यूज़ बाय
Sabiha khan
