News by Azam Lala
अयोध्या। राम मंदिर दान चोरी मामले की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे आरोपियों की संपत्ति और उनकी कथित आर्थिक स्थिति को लेकर नए खुलासे सामने आ रहे हैं। जांच एजेंसियों के रडार पर आए मुख्य आरोपियों में शामिल लवकुश मिश्रा की संपत्ति और पिछले एक साल में उनकी कथित आर्थिक तरक्की ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
जानकारी के अनुसार, लवकुश मिश्रा पिछले वर्ष तक एक निजी गैराज में वाहन मैकेनिक के तौर पर काम करते थे। इसके बाद उनकी नियुक्ति राम मंदिर में हुई, जहां उन्हें करीब 17 हजार रुपये प्रतिमाह वेतन मिलता था। हालांकि, जांच के दौरान सामने आए तथ्यों के अनुसार, नौकरी मिलने के कुछ ही महीनों के भीतर उनकी जीवनशैली और संपत्ति में तेजी से बदलाव देखने को मिला, जिसकी अब जांच की जा रही है।
पत्नी के नाम खरीदी 1000 वर्गफुट जमीन
अयोध्या के शहादतगंज इलाके में जयपुरिया स्कूल के पीछे स्थित एक निर्माणाधीन मकान इस समय चर्चा का विषय बना हुआ है। बताया जा रहा है कि यह लगभग 1000 वर्गफुट का प्लॉट इसी वर्ष फरवरी में लवकुश मिश्रा ने अपनी पत्नी सुप्रिया मिश्रा के नाम पर खरीदा था। स्थानीय स्तर पर इस जमीन की अनुमानित कीमत करीब 25 लाख रुपये बताई जा रही है।
जमीन खरीदने के तुरंत बाद यहां तीन मंजिला मकान का निर्माण शुरू कराया गया। फिलहाल दो मंजिलों का निर्माण लगभग पूरा हो चुका है। भवन के पहले तल पर बड़ा किचन, चार कमरे तथा भविष्य में लिफ्ट लगाने के लिए अलग से स्थान भी छोड़ा गया है। निर्माणाधीन मकान की भव्यता को देखते हुए स्थानीय लोग भी इसकी चर्चा कर रहे हैं।
रिश्तेदारों की संपत्ति भी जांच के दायरे में
जांच में यह भी सामने आया है कि लवकुश मिश्रा की पत्नी सुप्रिया मिश्रा, इसी मामले के एक अन्य आरोपी अनुकल्प मिश्रा की बहन हैं। आरोप है कि अनुकल्प मिश्रा ने भी पिछले एक वर्ष के दौरान अपनी संपत्ति और रहन-सहन में तेजी से विस्तार किया। दोनों आरोपियों की संपत्तियों, बैंक खातों और लेनदेन की जांच की जा रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि उनकी आय के स्रोत क्या थे और क्या इनका संबंध कथित दान राशि के गबन से है।
पुलिस की जांच जारी
पुलिस और जांच एजेंसियां आरोपियों की चल-अचल संपत्तियों, बैंक खातों, नकदी और वित्तीय लेनदेन की विस्तृत पड़ताल कर रही हैं। अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि संपत्ति अर्जित करने में किसी अवैध धन का उपयोग हुआ या नहीं। फिलहाल मामला न्यायिक प्रक्रिया के अधीन है और आरोप अभी जांच के दायरे में हैं।
