अभिनेत्री और मॉडल (Twisha Sharma) की संदिग्ध मौत के हाई-प्रोफाइल मामले से जुड़ा है। भोपाल में हुए इस चर्चित मामले में पुलिस की शुरुआती जांच पर कई गंभीर सवाल उठे हैं। रिपोर्ट के अनुसार, इस से जुड़े मुख्य बिंदु और मामले की अधिक जानकारी नीचे दी गई है :-
मुख्य साक्ष्य (रस्सी) को लेकर लापरवाही :
निजी कार में रखा साक्ष्य: घटना के बाद 13 मई की सुबह सब इंस्पेक्टर (SI) दिनेश शर्मा ने फंदे की वह महत्वपूर्ण रस्सी जब्त की थी। नियमों के तहत इसे तुरंत फॉरेंसिक जांच या सुरक्षित मालखाने में भेजा जाना था, लेकिन उन्होंने इसे एम्स (AIIMS) भेजने के बजाय काफी समय तक अपनी निजी कार में रखा।
पहचान करने वाले का रिकॉर्ड गायब: पुलिस की लिखापढ़ी में उस व्यक्ति का कोई स्पष्ट विवरण या नाम दर्ज नहीं है, जिसने घटना के समय उस फंदे (रस्सी) की पहचान की थी। जांच की डिटेल्स लीक होने का आरोप गिरिबाला सिंह तक पहुंच रही थी जानकारी: मृतका ट्विशा शर्मा की सास गिरिबाला सिंह (जो कि एक सेवानिवृत्त जिला न्यायाधीश हैं) और उनके वकील के पास केस डायरी से जुड़े बेहद गोपनीय और अहम दस्तावेज अग्रिम जमानत याचिका दाखिल करने से पहले ही पहुंच गए थे।चूंकि उस समय वे आधिकारिक तौर पर आरोपी की श्रेणी में नहीं थीं, इसलिए कानूनी तौर पर उन्हें इन गोपनीय दस्तावेजों को देखने का कोई अधिकार नहीं था, जिससे जांच प्रक्रिया पर सवाल खड़े हुए हैं।
केस का बैकग्राउंड (मामला क्या है?) :
ससुराल में मिली थी लाश: 33 वर्षीय ट्विशा शर्मा की शादी एडवोकेट समर्थ सिंह से हुई थी। शादी के महज 5 महीने के भीतर ही 12 मई की रात को भोपाल स्थित उनके ससुराल में उनका शव संदिग्ध परिस्थितियों में लटका मिला था। दहेज और प्रताड़ना का आरोप: ट्विशा के माता-पिता ने उनके पति समर्थ सिंह और सास गिरिबाला सिंह पर मानसिक-शारीरिक प्रताड़ना और रुपयों की मांग करने का गंभीर आरोप लगाया है।
दूसरा पोस्टमार्टम और सीबीआई जांच: पहली पोस्टमार्टम रिपोर्ट में विसंगतियां होने के कारण परिवार ने अदालत का रुख किया। इसके बाद मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के आदेश पर दिल्ली एम्स (AIIMS) के डॉक्टरों की एक विशेष टीम ने भोपाल आकर ट्विशा के शव का दूसरा पोस्टमार्टम किया। मामले की गंभीरता को देखते हुए राज्य सरकार की सिफारिश पर अब इसकी जांच सीबीआई (CBI) को सौंप दी गई है।

ट्विश शर्मा केस में आरोपियों को 16 जून तक हिरासत में लिया।
ट्विशा शर्मा (Twisha Sharma) संदिग्ध मौत मामले में 2 जून 2026 को विशेष सीबीआई अदालत ने मुख्य आरोपी पति समर्थ सिंह और सास गिरिबाला सिंह को 16 जून 2026 तक के लिए 14 दिन की न्यायिक हिरासत (जेल) में भेज दिया है। इस केस को मध्य प्रदेश पुलिस से सीबीआई (CBI) को सौंपे जाने के बाद जांच काफी तेज हो गई है।
इस केस की वर्तमान स्थिति और कानूनी प्रक्रियाओं को देखते हुए आगे निम्नलिखित घटनाक्रम होने की प्रबल संभावना है:
फॉरेंसिक और साइंटिफिक रिपोर्ट का आना (सबसे महत्वपूर्ण) दूसरे पोस्टमार्टम (AIIMS) की फाइनल रिपोर्ट: दिल्ली एम्स के डॉक्टरों द्वारा किए गए दूसरे पोस्टमार्टम की विस्तृत रिपोर्ट सीबीआई के पास आएगी। मृतका के शरीर पर मिले 7 गंभीर चोटों के निशान (Blunt Force Injuries) और मौत के समय को लेकर पुलिस की थ्योरी और एम्स की रिपोर्ट का मिलान किया जाएगा, जिससे यह साफ होगा कि यह आत्महत्या है या सुनियोजित हत्या। क्राइम सीन री-क्रिएशन की रिपोर्ट: सीबीआई ने डमी (ट्विशा के वजन के समान पुतले) का उपयोग करके घटना का री-क्रिएशन किया है। इसकी रिपोर्ट यह साबित करने में मदद करेगी कि क्या फांसी का फंदा उस ऊंचाई और परिस्थितियों में खुद लगाया जा सकता था। डिजिटल और सीसीटीवी साक्ष्य: जब्त किए गए मोबाइल फोन, डिलीट की गई चैट्स और घर के सीसीटीवी कैमरों की फॉरेंसिक लैब (FSL) से विस्तृत रिपोर्ट आना बाकी है।
आरोपियों की मुश्किलें बढ़ना और पुनः रिमांड
भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 187: हालांकि सीबीआई ने अभी दोनों आरोपियों को जेल भेज दिया है, लेकिन मृतका के परिवार के वकील एडवोकेट अंकुर पांडे के अनुसार, नए गवाहों के बयान या साक्ष्यों में विरोधाभास मिलने पर सीबीआई कोर्ट में आवेदन देकर आरोपियों को दोबारा पुलिस रिमांड पर ले सकती है।
दबाव और साक्ष्य छिपाने की जांच: स्थानीय पुलिसकर्मियों (जैसे सब इंस्पेक्टर दिनेश शर्मा, जिन्होंने रस्सी को अपनी निजी कार में रखा) और शुरुआती पोस्टमार्टम करने वाले डॉक्टरों से सीबीआई गहन पूछताछ करेगी। यदि पुलिस और आरोपियों के बीच कोई सांठगांठ या सबूत मिटाने की बात साबित होती है, तो केस में नए सह-आरोपियों के नाम जुड़ सकते हैं।

