क्या बढ़ता स्क्रीन टाइम बच्चों में दांतों की सड़न का एक छिपा हुआकारण बन रहा है?
डॉ डॉ. शिल्पी तिवारी,
बाल दंत विशेषज्ञ (पीडियाट्रिक डेंटिस्ट)
प्रोफेसर, पीपुल्स कॉलेज ऑफ डेंटल साइंसेज एंड रिसर्च सेंटर, भोपाल
संस्थापक एवं संचालक, किड्स डेंटल होम
भोपाल, मध्य प्रदेश
एक रविवार की सुबह थी। आठ वर्षीय आरव अपने कमरे में बैठा मोबाइल पर गेम खेल रहा था। मां ने कई बार नाश्ते के लिए आवाज़ लगाई, लेकिन उसका ध्यान स्क्रीन से हट ही नहीं रहा था। आखिरकार मां ने उसके हाथ में बिस्किट का पैकेट और जूस का गिलास पकड़ा दिया। गेम चलता रहा, बिस्किट खत्म होते रहे और जूस भी धीरे-धीरे पी लिया गया। आरव को शायद यह भी याद नहीं था कि उसने कितना खाया है।
यह केवल एक दिन की बात नहीं थी। धीरे-धीरे यह उसकी दिनचर्या बन गई। स्कूल से लौटने के बाद मोबाइल, कार्टून, वीडियो और ऑनलाइन गेम उसके सबसे अच्छे साथी बन गए। स्क्रीन देखते समय उसे बार-बार कुछ न कुछ खाने की आदत पड़ गई। कभी चॉकलेट, कभी बिस्किट, कभी चिप्स और कभी मीठे पेय पदार्थ।
मोबाइल में पूरा ध्यान होने के कारण वह भोजन को सामान्य से अधिक समय तक मुंह में रखता, धीरे-धीरे चबाता और कई बार एक छोटा-सा स्नैक भी लंबे समय तक खाता रहता। उसे यह एहसास ही नहीं होता था कि वह दिनभर में कितनी बार कुछ खा चुका है। स्क्रीन में खोए रहने के कारण वह पर्याप्त पानी भी नहीं पीता था। कई बार रात में मोबाइल देखते-देखते ही सो जाता और ब्रश करना भी भूल जाता।
कुछ महीनों बाद आरव ने ठंडा पानी पीते समय दांतों में झनझनाहट की शिकायत की। फिर एक दिन चॉकलेट खाते समय उसे तेज दर्द हुआ। जब उसे दंत चिकित्सक के पास ले जाया गया तो जांच में कई दांतों में सड़न और कुछ दांतों में गहरी कैविटी पाई गई।
आरव की मां की आंखों में चिंता साफ दिखाई दे रही थी। उन्होंने दंत चिकित्सक से पूछा,
“डॉक्टर साहब, मेरे बच्चे के दांत इतने खराब कैसे हो गए? हमें तो पता ही नहीं चला कि समस्या इतनी बढ़ गई है। वह तो बस मोबाइल देखते हुए थोड़ा – बहुत खालेता था।हमने कभी सोचा भी नहीं था कि यह आदत उसके दांतों को इतना नुकसान पहुंचा सकती है।”
दंत चिकित्सक ने समझाते हुए कहा,
“यही तो सबसे बड़ी चुनौती है। दांतों में सड़न अचानक नहीं होती, बल्कि धीरे–धीरे विकसित होता है। शुरुआत में दर्द या कोई विशेषल क्षण नहीं दिखाई देते, इसलिए माता–पिता को भी पता नहीं चलता। जब तक दर्द शुरू होता है, तब तक सड़न काफी आगे बढ़ चुकी होती है।“
उन्होंने आगे कहा,
“समस्या सिर्फ मोबाइल नहीं है, बल्कि मोबाइल से जुड़ी वे आदतें हैं जो धीरे–धीरे बच्चों के दांतों को नुकसान पहुंचाने लगती हैं।स्क्रीन पर ध्यान होने के कारण बच्चे अन जाने में बार–बार खाते रहते हैं। कई बार वे भोजन को सामान्य से अधिक समय तक मुंह में रखते हैं और धीरे–धीरे खाते रहते है |इससे दांतों पर चिपके खाद्य पदार्थ लंबे समय तक बने रहते हैं। मुंह में मौजूद जीवाणु इन खाद्य पदार्थों में मौजूद चीनी का उपयोग करके ऐसे पदार्थ बनाते हैं जो दांतों की बाहरी सतह को धीरे–धीरे कमजोर करने लगते हैं। जब यह प्रक्रिया दिन में कई बार दोहराई जाती है, तो विकसित होने लगता है।“
“इसके अलावा मोबाइल में व्यस्त रहने वाले बच्चे अक्सर पर्याप्त पानी नहीं पीते। पानी मुंह की प्राकृतिक सफाई में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।यह भोजन के कणों को साफ करने में मदद करता है और दांतों की सुरक्षाप्रणाली को बेहतर बनाए रखता है। लेकिन जब बच्चा घंटों स्क्रीन में डूबा रहता है, तो पानी पीना भी भूल जाता है।“
आरव की कहानी आज केवल एक बच्चे की कहानी नहीं है। यह उन हजारों बच्चों की कहानी है जिनका बचपन धीरे-धीरे स्क्रीन के इर्द-गिर्द सिमटता जा रहा है। मोबाइल स्वयं दांतों को नुकसान नहीं पहुंचाता, लेकिन उससे जुड़ी जीवनशैली और खान-पान की आदतें बच्चों के मौखिक स्वास्थ्य के लिए एक नई चुनौती बनकर उभर रही हैं।
स्क्रीन टाइम और दांतों में सड़न: क्या है संबंध?
आज के बच्चों में स्क्रीन टाइम बढ़ने के साथ कुछ सामान्य व्यवहार अधिक देखने को मिलते हैं—
- बार-बार स्नैकिंग करना
- मीठे पेय पदार्थों का अधिक सेवन
- भोजन को लंबे समय तक मुंह में रखना
- पानी कम पीना
- देर रात तक जागना
- रात में ब्रश करना भूल जाना
- शारीरिक गतिविधियों में कमी
ये सभी कारक मिलकर दांतों में सड़न के जोखिम को बढ़ा सकते हैं।
माता–पिता क्या करें?
बच्चों को मोबाइल से पूरी तरह दूर रखना संभव नहीं है, लेकिन कुछ छोटी-छोटी सावधानियां उनकी मुस्कान को सुरक्षित रख सकती हैं—
✓ भोजन के समय मोबाइल, टीवी और अन्य स्क्रीन बंद रखें।
✓ बच्चे को मोबाइल देखते हुए खाने की आदत न डालें।
✓ बार-बार स्नैकिंग की बजाय निश्चित समय पर भोजन और नाश्ता दें।
✓ चॉकलेट, कैंडी, कुकीज़ और मीठे पेय पदार्थों का सेवन सीमित करें।
✓ बच्चों को फल, सलाद, पनीर, दही और अन्य पौष्टिक विकल्प उपलब्ध कराएं।
✓ बच्चों को नियमित अंतराल पर पानी पीने की आदत डालें और पानी की बोतल हमेशा पास रखें।
✓ यदि बच्चा ऑनलाइन पढ़ाई या गेमिंग कर रहा है, तो हर 30–40 मिनट में छोटा ब्रेक लेने के लिए प्रेरित करें।
✓ सोने से पहले ब्रश करना उतना ही आवश्यक है जितना रात का भोजन।
✓ छोटे बच्चों की ब्रशिंग पर माता-पिता स्वयं निगरानी रखें।
✓ पुरस्कार के रूप में चॉकलेट या मिठाई देने की आदत से बचें।
✓ परिवार में “स्क्रीन-फ्री मील टाइम” का नियम बनाएं।
✓ बच्चों को आउटडोर खेलों और शारीरिक गतिविधियों के लिए प्रेरित करें।
✓ हर छह महीने में नियमित दंत परीक्षण करवाएं, भले ही बच्चे को कोई शिकायत न हो।
निष्कर्ष
तकनीक आज के जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा है और बच्चों को इससे पूरी तरह दूर रखना न तो संभव है और न ही आवश्यक। आवश्यकता है संतुलन की। यदि माता-पिता स्क्रीन टाइम, खान-पान और मौखिक स्वच्छता के बीच सही संतुलन स्थापित कर लें, तो अधिकांश दांतों में सड़न को रोका जा सकता है।
आखिरकार, बच्चों की सबसे सुंदर पहचान उनकी निश्छल मुस्कान है। कहीं ऐसा न हो कि चमकती हुई स्क्रीन के आकर्षण में हम अपने बच्चों की वही मुस्कान धीरे-धीरे खो दें।
