मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में एक ओर पुलिस अपराध और अवैध गतिविधियों पर लगाम लगाने के दावे करती है, वहीं दूसरी ओर थाना तलैया क्षेत्र में खुलेआम संचालित हो रहा सट्टे का काला कारोबार पुलिस की कार्यप्रणाली पर कई गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। हैरानी की बात यह है कि यह अवैध कारोबार थाने से महज 500 मीटर की दूरी पर संचालित होने की चर्चा क्षेत्र में आम है, लेकिन इसके बावजूद कार्रवाई के नाम पर केवल खानापूर्ति किए जाने के आरोप लग रहे हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि क्षेत्र का एक कथित सटोरिया लंबे समय से बेखौफ होकर सट्टे का कारोबार चला रहा है। उसके हौसले इतने बुलंद हैं कि उसे कानून या पुलिस कार्रवाई का कोई डर दिखाई नहीं देता। दिनभर उसके ठिकानों पर लोगों की आवाजाही बनी रहती है और लाखों रुपये के दांव लगाए जाने की चर्चाएं क्षेत्र में आम हैं।
जानकार बताते हैं कि कुछ समय पहले पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने इस अवैध कारोबार के खिलाफ सख्त रुख अपनाया था। उनके नेतृत्व में आधा दर्जन से अधिक बार छापामार कार्रवाई की गई थी, जिससे सट्टे का नेटवर्क लगभग बंद हो गया था। उस दौरान कई सटोरियों पर शिकंजा कसा गया और अवैध गतिविधियों पर काफी हद तक रोक लगी थी।
लेकिन अधिकारी के स्थानांतरण के बाद हालात फिर बदलते नजर आ रहे हैं। आरोप है कि सट्टे का यह कारोबार एक बार फिर सक्रिय हो चुका है और पहले की तरह अपने पैर पसार रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि क्षेत्रीय पुलिस को इस गतिविधि की पूरी जानकारी होने के बावजूद प्रभावी कार्रवाई नहीं की जा रही है, जिससे सटोरियों के हौसले लगातार बढ़ते जा रहे हैं।
क्षेत्र में यह सवाल भी चर्चा का विषय बना हुआ है कि आखिर ऐसा कौन सा संरक्षण है जिसके दम पर यह अवैध कारोबार खुलेआम संचालित हो रहा है। जब थाने के इतने करीब सट्टे का नेटवर्क सक्रिय हो सकता है तो कानून व्यवस्था पर सवाल उठना स्वाभाविक है। लोगों का मानना है कि यदि समय रहते सख्त कार्रवाई नहीं की गई तो यह अवैध कारोबार और अधिक फैल सकता है, जिससे युवाओं और आम नागरिकों पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।
स्थानीय नागरिकों ने पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों से मांग की है कि मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और सट्टे के इस कथित नेटवर्क पर कठोर कार्रवाई की जाए। साथ ही यह भी पता लगाया जाए कि आखिर किन कारणों से बार-बार कार्रवाई के बावजूद यह अवैध कारोबार दोबारा सक्रिय हो जाता है।
अब देखना यह होगा कि पुलिस विभाग इस मामले को कितनी गंभीरता से लेता है और क्या थाना तलैया क्षेत्र में चल रहे इस कथित सट्टा कारोबार पर प्रभावी अंकुश लग पाता है या नहीं। फिलहाल क्षेत्र में एक ही सवाल गूंज रहा है—क्या कानून का डर खत्म हो गया है, या फिर सट्टे के इस खेल को किसी का संरक्षण हासिल है?
