News by Azam lala ✍️✍️
कान्हा सैया के पास एक बुज़ुर्ग ख़ातून लावारिस हालत में मिलीं — थकी हुई निगाहें, बिखरे हुए एहसास और ज़हन पर बेबसी की गर्द।
मगर पुलिस ने उन्हें “मामला” नहीं समझा, बल्कि एक माँ की तरह सहारा दिया। एफआरवी में तैनात प्रधान आरक्षक विनोद कुमार और महिला आरक्षक खुशबू पवार मौके पर पहुंचे। नर्मी से पूछताछ की, हाल जाना और फिर इंसानियत का वो चेहरा दिखाया जो अक्सर सुर्खियों में नहीं आता।
बुज़ुर्ग महिला ने अपना नाम बसंती अहीर बताया, जो उत्तर प्रदेश के बलिया ज़िले की रहने वाली हैं। ज़हनी तौर पर परेशान होने की वजह से उन्हें यह भी याद नहीं था कि भोपाल कैसे पहुंचीं। लेकिन बिलखिरिया पुलिस ने उन्हें बेसहारा नहीं छोड़ा। पहले 1250 अस्पताल में मेडिकल कराया गया, फिर खाने का इंतज़ाम हुआ और रात को सुरक्षित ठिकाना दिया गया।
आज उन्हें चार इमली स्थित वृद्ध आश्रम में सुरक्षित पहुंचा दिया गया है और उत्तर प्रदेश पुलिस को भी सूचना भेज दी गई है।
ये सिर्फ पुलिस की कार्रवाई नहीं, बल्कि “इंसानियत की हिफाज़त” की मिसाल है। जहां वर्दी ने कानून के साथ-साथ इंसानी जज़्बात का भी फ़र्ज़ निभाया।
भोपाल देहात पुलिस ने साबित कर दिया कि “ख़िदमत जब नियत बन जाए, तो वर्दी रहमत नज़र आने लगती है।”
