NEWS BY : AAZAM LALA
ऐसा लगता है जैसे वार्ड 78 जोन 17 का हिस्सा ही नहीं है | भीषण गर्मी में जब प्यास से बेहाल लोग अपनी बस्तियों में पानी की एक-एक बूंद के लिए तरस रहे हों, तब असली पहचान किसी पद, कुर्सी या सत्ता से नहीं होती—बल्कि उस इंसान से होती है जो बिना किसी स्वार्थ के लोगों के दुख-दर्द में उनके साथ खड़ा हो जाए।
Bhopal के वार्ड 78 स्थित एहसान नगर में पिछले दो महीनों से पेयजल संकट ने रहवासियों की जिंदगी कठिन बना दी है। नर्मदा पाइपलाइन बिछाए जाने के बावजूद कई घरों तक पर्याप्त पानी नहीं पहुंच रहा। कहीं प्रेशर इतना कम है कि नलों से केवल बूंदें टपकती हैं, तो कहीं लोगों को यह तक पता नहीं होता कि पानी कब आएगा और कब बंद हो जाएगा।
कभी रात दो बजे, कभी सुबह नौ बजे, तो कभी दोपहर में अचानक पानी आने से लोगों की दिनचर्या पूरी तरह प्रभावित हो गई है। कई परिवारों को केवल इस इंतजार में नलों के पास किसी एक सदस्य को बैठाकर रखना पड़ता है कि कहीं पानी आ जाए और वे उसे भर सकें।
ऐसे कठिन समय में जब लोग अपनी शिकायतें लेकर दर-दर भटक रहे हैं, तब एक नाम फिर लोगों के बीच उम्मीद बनकर सामने आया—हफीज़ खान।
न कोई सरकारी पद, न कोई आधिकारिक रुतबा, लेकिन जनता के दुख-दर्द को अपना समझने वाला एक संवेदनशील दिल। स्थानीय कांग्रेस नेता हफीज़ खान ने पूर्व विधायक प्रत्याशी मनोज शुक्ला के साथ एहसान नगर पहुंचकर रहवासियों की समस्याएं सुनीं और प्रशासन को स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि जल्द समाधान नहीं हुआ तो जनआंदोलन किया जाएगा।
हफीज़ खान की पहचान किसी कुर्सी से नहीं, बल्कि उनकी इंसानियत से है। वे उन लोगों में हैं जो मानते हैं कि राजनीति का सबसे बड़ा उद्देश्य जनता की सेवा है।
जो लोगों के आंसू पढ़ ले, वही असली नेता कहलाता है, जो बिना पद के साथ खड़ा हो, वही दिलों पर राज करता है। एहसान नगर की जनता आज केवल पानी नहीं मांग रही, बल्कि अपने अधिकार की मांग कर रही है। स्वच्छ पेयजल हर नागरिक का मूल अधिकार है, और प्रशासन की जिम्मेदारी है कि वह इस अधिकार को सुनिश्चित करे।
अगर समय रहते इस समस्या का समाधान नहीं किया गया, तो यह केवल पानी का संकट नहीं रहेगा, बल्कि जनता के धैर्य की परीक्षा बन जाएगा।
न सत्ता की चाह, न शोहरत का ताज बस हर एक का दर्द दूर हो जाए यही है मेरा ख्वाब |
