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स्ट्रेट ऑफ हार्मुज़ में तनाव |

स्ट्रेट ऑफ हार्मुज़ क्या है?
यह ईरान, ओमान और UAE के बीच 33 किलोमीटर की छोटी सी जगह है। यह एक ऐसा पतला समुद्री रास्ता है जिससे दुनिया की 20% तेल सप्लाई, मतलब करीब 17 मिलियन बैरल तेल गुज़रता है। यह तेल फारस की खाड़ी के आठ देशों से आता है, जिनमें ईरान, इराक, कुवैत, बहरीन, कतर, सऊदी अरब और UAE शामिल हैं। इन चार देशों, UAE, सऊदी अरब, कुवैत और कतर का 90% तेल एक्सपोर्ट इसी पतले रास्ते से होकर बाकी दुनिया में जाता है। अगर ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य को ब्लॉक कर देता है तो सबसे ज़्यादा नुकसान किन देशों को होगा? इसमें भारत सबसे ऊपर है क्योंकि भारत अपना 85% तेल विदेशों से इंपोर्ट करता है और इस 85% का 60% इराक, सऊदी अरब, कुवैत और UAE जैसे मिडिल ईस्ट के देशों से आता है। भारत में फ्यूल की कीमतें आसमान छू जाएंगी और इसके नतीजे में तेल और इंडस्ट्रीज़ से जुड़ी हर चीज़ पूरी तरह से अस्त-व्यस्त हो जाएगी
महत्व:
दुनिया के कुल तेल उत्पादन का लगभग 20% हिस्सा इस जलमार्ग से गुजरता है।
यह जलमार्ग मध्य पूर्व के तेल उत्पादक देशों से दुनिया के बाकी हिस्सों में तेल की आपूर्ति के लिए एक महत्वपूर्ण मार्ग है।
यह जलमार्ग भारत, चीन, जापान और यूरोप जैसे देशों के लिए एक महत्वपूर्ण व्यापारिक मार्ग है
स्ट्रेट ऑफ हॉर्मूज़ की लंबाई लगभग 90 मील (145 किमी) है।इसकी गहराई लगभग 60 मीटर (200 फीट) है।
यह जलमार्ग ईरान के दक्षिणी तट और ओमान के उत्तरी तट के बीच स्थित है
स्ट्रेट ऑफ हार्मुज़ में तनाव
बीते 3-4 महीनों में स्ट्रेट ऑफ हार्मुज़ में तनाव की स्थिति बनी हुई है। ईरान ने इस महत्वपूर्ण जलमार्ग में बारूदी सुरंगें बिछाई हैं, जिसके कारण ग्लोबल ऑयल और गैस की सप्लाई ठप हो गई है और शांति वार्ता पर दबाव बढ़ रहा है।
स्ट्रेट ऑफ हार्मुज़ पर 3 से 4 महीने का असर काफी गंभीर है। अगर यह रास्ता नहीं खुलता है, तो वैश्विक तेल आपूर्ति में 20% की कमी आ सकती है, जिससे तेल की कीमतें 30-50% बढ़ सकती हैं। इसका असर न केवल भारत पर, बल्कि पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा।

भारत पर असर:

  • पेट्रोल और डीजल की कीमतें 150-200 रुपये लीटर तक पहुंच सकती हैं।
  • एलपीजी और अन्य ईंधन की किल्लत हो सकती है।
  • खाद्य सुरक्षा पर असर पड़ सकता है, जिससे अनाज की कीमतें बढ़ सकती हैं।
  • उद्योगों और ट्रांसपोर्ट पर असर पड़ने से आर्थिक मंदी की आशंका है ।

वैश्विक असर:

  • वैश्विक महंगाई बढ़ सकती है।
  • शेयर बाजार में गिरावट आ सकती है।
  • वैश्विक आपूर्ति शृंखला टूट सकती है, जिससे सामान की कमी हो सकती है।
    ईरान की बारूदी सुरंगें और वैकल्पिक रूट की खोज
    ईरान ने तनाव के बढ़ते हुए समुद्री मार्ग पर अपनी बारूदी सुरंगे बिछा देने से आने जाने वालों के बीच एक डर का माहौल भी है जिसमें ईरान को सहयोग करने वालों को आसानी से गुज़ार दिया जाता है वही अमरीका और इज़रायल का समर्थन करने वाले देशों को ईरान वहां से जाने नहीं देता इसके बीच अब, जिससे एक वैकल्पिक रूट की संभावना सामने आई है। यह जहाज पुराने रास्ते की बजाय ओमान के तट के पास से गुजर रहे हैं ।
    ट्रैफिक जाम और सीजफायर
    सीजफायर के बाद भी स्ट्रेट ऑफ हार्मुज़ में ट्रैफिक जाम की स्थिति बनी हुई है। 1,800 से ज्यादा जहाज अभी भी समुद्र में फंसे हुए हैं, और प्रतिदिन केवल 1-2 जहाज ही गुजर पा रहे हैं। यह स्थिति वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा के लिए चिंताजनक है ।
    क्या आपको लगता है कि स्ट्रेट ऑफ हार्मुज़ में तनाव की स्थिति जल्द ही हल होगी? क्या वैकल्पिक रूट की खोज से स्थिति में सुधार हो सकता है?
    स्ट्रेट ऑफ हार्मुज़ बंद होने की स्थिति में भारत सरकार और वैश्विक समुदाय के लिए कई चुनौतियाँ होंगी। यहाँ कुछ संभावित कदम हैं जो उठाए जा सकते हैं:
    वैश्विक समुदाय के कदम:
  1. निरंतर संवाद: वैश्विक समुदाय निरंतर संवाद बनाए रख सकता है और स्ट्रेट ऑफ हार्मुज़ के मुद्दे पर चर्चा कर सकता है।
  2. आंतरराष्ट्रीय दबाव: वैश्विक समुदाय ईरान और अन्य संबंधित देशों पर अंतरराष्ट्रीय दबाव डाल सकता है ताकि वे स्ट्रेट ऑफ हार्मुज़ को बंद न करें। लेकिन ईरान किसी से भी दबने के मूड में नहीं है।
  3. वैकल्पिक मार्ग: वैश्विक समुदाय वैकल्पिक मार्गों की खोज कर सकता है, जैसे कि मध्य एशिया से यूरोप तक ऊर्जा पाइप लाइन का निर्माण।
    18 अप्रैल 2026 तक की स्थिति के अनुसार, ईरान ने लेबनान-इजरायल युद्धविराम के बाद होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को सभी वाणिज्यिक जहाजों के लिए खोल दिया था, जिससे वैश्विक तेल बाजारों को कुछ घंटों की राहत मिली थी । लगभग 48 दिनों के तनाव के बाद, जहाजों को निर्दिष्ट मार्गों का पालन करने की शर्तों के साथ आवा जाही फिर से शुरू की गई थी।
    होर्मुज जलडमरूमध्य: ताज़ा स्थिति (18 अप्रैल 2026)
    मार्ग खोलना: ईरानी विदेश मंत्री ने पुष्टि की कि जलडमरूमध्य सभी व्यावसायिक जहाजों के लिए खुला था मगर 24 घंटों के भीतर ही बंद कर दिया गया, जिससे वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में सुधार आ सकता था।
    युद्धविराम का प्रभाव: यह निर्णय 22 अप्रैल तक चलने वाले 10-दिवसीय लेबनान युद्धविराम के बाद लिया गया है।
    17 अप्रैल 2026 ईरान ने सभी जहाजों के लिए होर्मुज खोलने का ऐलान किया था… ट्रम्प ने थैंक्यू ईरान का पोस्ट किया था, कहा- डील साइन होने तक होर्मुज पर अमेरिका की नाकाबंदी रहेगी मगर यह वार्ता 24 घंटे भी नहीं चल सकी जिसके बाद फिर से स्ट्रेट ऑफ हार्मुज़ पर तनाव बढ़ गया और उसे बंद कर दिया गया।
    तेल की कीमतों में गिरावट: इस घोषणा के बाद वैश्विक तेल की कीमतों में 10% से अधिक की गिरावट आई, जिससे शेयर बाजारों में तेजी देखी गई।
    अमेरिकी प्रतिक्रिया: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा है कि जब तक तेहरान के साथ कोई समझौता नहीं हो जाता, ईरानी बंदरगाहों की अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी जारी रहेगी। ईरान के भीतर इस फैसले को लेकर मिश्रित प्रतिक्रियाएं हैं और स्थिति अभी भी अस्थिर है।
    भारत सरकार के कदम:
    ईरान ने भारत समेत पांच मित्र देशों के जहाजों को होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने की अनुमति दे दी है। इन देशों में भारत, रूस, चीन, इराक और पाकिस्तान शामिल हैं। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि वे अपने मित्र देशों के साथ सहयोग बढ़ाना चाहते है।
    भारत के लिए यह एक बड़ी कूटनीतिक जीत है, क्योंकि देश अपनी ऊर्जा जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा इसी क्षेत्र से आयात करता है। ईरान ने कहा है कि यह अनुमति कुछ शर्तों के साथ है
    अमेरिका जिन नितियों के साथ देशों पर दबाव बनाया है वो खतरनाक है उन सभी नितियों के खिलाफ़ हमारे अमरीका से कुछ सवाल है क्या अमेरिका इन सवालों के जवाब दे पाएगा ?

अमेरिका हमेशा उन्हीं देशों पर हमला क्यों करता है जिनके पास ऑयल या प्राकृतिक संसाधन होते हैं ?

आखिर अमेरिका ईरान से चाहता क्या है ?

क्या सभी मुस्लिमों देशों को अमेरिका उनके प्राकृतिक संसाधन के लिए दबाना चाहता है ?

NEWS BY : RAZA LALA

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